दिवाली का त्योहार नजदीक है. लेकिन इस बार का माहौल थोड़ा अलग है. दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा में पहले से ही प्रदूषण बढ़ा हुआ है और पटाखों पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है. लेकिन एक ताजा सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो एक दिलचस्प तस्वीर दिखा रहे हैं.
दिल्ली-NCR में LocalCircles के सर्वे में इस साल दिवाली पर पटाखे फोड़ने को लेकर लोगों का नजरिया इसमें बताया गया है और ये भी जिक्र किया गया है कि इससे पर्यावरण और प्रदूषण पर क्या असर होगा. इस सर्वे में जो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, उनके मुताबिक 55 फीसदी लोगों ने कहा कि वो इस दिवाली पर पटाखे नहीं फोड़ेंगे क्योंकि इससे प्रदूषण होता है.
पटाखे फोड़ने को लेकर सर्वे
वहीं 19 परसेंट लोगों ने इच्छा जताई है कि वो पटाखे फोड़ना चाहेंगे, 9 फीसदी लोगों ने कहा कि वो पटाखे फोड़ेंगे और उन्हें ये भी पता है कि वो कहां से पटाखे हासिल कर सकते हैं. जबकि 8 फीसदी लोगों ने इस बारे में कोई साफ जवाब नहीं दिया.
कुल मिलाकर करीब 18 फीसदी परिवार इस बार दिवाली पर पटाखे फोड़ने का इरादा रखते हैं. हालांकि सरकार के आदेश के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में 1 जनवरी 2025 तक पटाखों के निर्माण, स्टोरेज, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण बैन है.
सरकार के इस फैसले का मकसद प्रदूषण के लेवल को कंट्रोल करना है क्योंकि सर्दियों में AQI का स्तर बेहद खराब हो जाता है. हालांकि करवा चौथ के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से संकेत मिल रहे हैं कि सरकार के आदेश के बावजूद कई लोग पटाखे फोड़ रहे हैं.
दिल्ली के कई इलाकों में AQI 350 के पार
इससे ये भी इशारा मिलता है कि कुछ लोग प्रतिबंधों को लेकर उदासीन हैं और पर्यावरण के नुकसान पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. दिवाली से पहले ही दिल्ली-NCR के कई इलाकों में AQI 350 के पार पहुंच चुका है जो कि 'गंभीर' श्रेणी में आता है. ऐसे में दिवाली पर पटाखों का इस्तेमाल प्रदूषण के स्तर को और ज्यादा बढ़ा सकता है.
इससे खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. सर्वे के मुताबिक, लोगों का भी मानना है कि अगर सही तरीके से प्रतिबंध लागू नहीं किया गया तो हालात ज्यादा गंभीर हो सकते हैं.
लेकिन इसके बावजूद लोग पटाखे इसलिए फोड़ना चाहते हैं, क्योंकि कई लोग इसे परंपरा का हिस्सा मानते हैं, तो कुछ लोग बच्चों के लिए ऐसा करते हैं. इस बीच जागरुकता अभियान और वैकल्पिक विकल्पों जैसे इको-फ्रेंडली पटाखों को बढ़ावा देने से भी स्थिति में सुधार होने का अनुमान है, जिससे लोग परंपरा भी निभा सकेंगे और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा.