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सिर्फ 42 रुपये में भी आजीवन पेंशन, 2.45 करोड़ लोगों ने दिखाई दिलचस्पी

अटल पेंशन योजना
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अटल पेंशन योजना
हर शख्स चाहता है कि उसका भविष्य सुरक्षित हो लेकिन सही प्लानिंग नहीं होने की वजह से काफी परेशानी होती है. हालांकि, बुढ़ापे को सिक्योर करने के लिए करोड़ों लोगों ने केंद्र सरकार की अटल पेंशन योजना को चुना है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं..

जुड़ने वालों की संख्या 2.50 करोड़ के करीब
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जुड़ने वालों की संख्या 2.50 करोड़ के करीब
पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के मुताबिक अटल पेंशन योजना (एपीवाई) से जुड़ने वाले लोगों की संख्या 2.50 करोड़ के करीब पहुंचने वाली है.

अक्टूबर में 34.51 प्रतिशत इजाफा
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अक्टूबर में 34.51 प्रतिशत इजाफा  
जानकारी के मुताबिक अंशधारकों की संख्या सालाना आधार पर इस साल अक्टूबर के अंत में 34.51 प्रतिशत बढ़कर 2.45 करोड़ पहुंच गयी जो एक साल पहले अक्टूबर 2019 में 1.82 करोड़ थी. 
 

60 साल की उम्र के बाद पेंशन 
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60 साल की उम्र के बाद पेंशन 
आपको बता दें कि अटल पेंशन योजना का मकसद वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करना है.  इसमें 60 साल की उम्र के बाद न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी जाती है. इस योजना को देश का कोई भी नागरिक 18 से 40 साल की उम्र में ले सकता है.

42 रुपये से निवेश 
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42 रुपये से निवेश 
अगर निवेश के रकम की बात करें तो आप सिर्फ 42 रुपये से भी शुरू कर सकते हैं.  हालांकि, इसके लिए अंशधारक की उम्र का 18 साल होना जरूरी है. इस उम्र में अगर आप प्रति माह 42 रुपये निवेश करते हैं तो 60 साल की उम्र में 1 हजार रुपये प्रति माह मिलेगा. वहीं 210 रुपये के कंट्रीब्‍यूशन पर आपको प्रति माह 5 हजार रुपये मिलेंगे. इसके लिए उम्र 18 साल ही होनी चाहिए.

क्या है जरूरी 
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क्या है जरूरी 
योजना के लिये जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति का बैंक में खाता हो. इसमें 60 साल की उम्र के बाद न्यूनतम 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की पेंशन की गारंटी दी गयी है. योजना की खासियत यह है कि इसमें अंशधारक के निधन होने पर पेंशन उसके पति/पत्नी को दी जाती है.  इतना ही नहीं, दोनों के निधन के बाद पेंशन कोष में जमा राशि नामित व्यक्ति को दे दी जाती है.

पहले दो साल में लगभग 50 लाख अंशधारक जुड़े
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पहले दो साल में लगभग 50 लाख अंशधारक जुड़े
पीएफआरडीए के मुताबिक अटल पेंशन योजना से पहले दो साल में लगभग 50 लाख अंशधारक इससे जुड़े और तीसरे साल में यह संख्या दोगुनी होकर एक करोड़ पर पहुंच गयी. वहीं चौथे साल में यह संख्या बढ़कर 1.50 करोड़ हो गई थी.