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इस्तीफे के बाद विशाल सिक्का और Infosys की प्रेस कांफ्रेंस, कहा लड़ाई बोर्ड vs फाउंडर

देश की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी इंफोसिस के CEO-MD पद से विशाल सिक्का ने इस्तीफा दे दिया है. विशाल की जगह प्रवीण राव को अंतरिम CEO-MD बनाया गया है. इसके साथ की विशाल सिक्का को कंपनी के एक्जिक्यूटिव वाइस-चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है.

विशाल सिक्का ने दिया इस्तीफा, नारायणमूर्ति से विवाद विशाल सिक्का ने दिया इस्तीफा, नारायणमूर्ति से विवाद

देश की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी इंफोसिस के CEO-MD पद से विशाल सिक्का ने इस्तीफा दे दिया है. विशाल की जगह प्रवीण राव को अंतरिम CEO-MD बनाया गया है. इसके साथ की विशाल सिक्का को कंपनी के एक्जिक्यूटिव वाइस-चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है.

गौरतलब है कि विशाल सिक्का का इस्तीफा कंपनी की पोर्ड मीटिंग से ठीक एक दिन पहले आया. इस बोर्ड मीटिंग में इंफोसिस को कंपनी के शेयर्स बायबैक पर अहम फैसला करना था. इस्तीफे की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजार पर कंपनी के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली.

कंपनी के शेयर 7.49% फीसदी लुढ़ककर 965 रुपये पर पहुंच गए. वहीं इस खबर के असर से प्रमुख सेंस्टिव इंडेक्स सेंसेक्स 0.58 फीसदी की गिरावट के साथ 185 अंक नीचे चला गया.

इंफोसिस और सिक्का की प्रेस कांफ्रेस

सिक्का के इस्तीफे के बाद इंफोसिस की प्रेस कांफ्रेस करते हुए बताया कि विशाल सिक्का ने 3 महीने तक कंपनी को अपनी सेवाएं बतौर एक्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन की रजामंदी दी है. इस दौरान इंफोसिस मैनेजमेंट उनकी जगह पर उपयुक्त व्यक्ति की तलाश करेगी. कंपनी की इस प्रेस कॉंफ्रेंस में खुद विशाल सिक्का ने कैलिफॉर्निया से वीडियो लाइव के जरिए शिरकत की.

इंफोसिस की तरफ से बाजार नियामक सेबी को दी गई जानकारी के मुताबिक उनकी जगह पर प्रवीण राव को नियुक्त किया गया है.

क्या था विवाद ?

इंफोसिस के इस विवाद की जड़ में पूर्व चीफ फाइनेंनशियल ऑफिसर राजीव बंसल को दिया गया हर्जाना भत्ता है. बंसल को कंपनी ने 24 महीने की सैलरी कंपनी छोड़ते वक्त दी थी. इस रकम पर सेबी ने सवाल उठाया था जिसके बाद नारायण मूर्ति समेत अन्य फाउंडर्स ने विशाल सिक्का समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों को कंपनी से मिल रही सैलरी और हर्जाने पर सवाल खड़ा कर इंफोसिस बोर्ड के सामने सवाल खड़ा कर दिया था.

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इंफोसिस के विवाद पर भारत पर असर

इंफोसिस के मौजूदा बोर्ड और फाउंडर्स में यह विवाद ऐसे वक्त में देखने को मिल रहा है जब देश का पूरा सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर मंदी के संकेत दे रहा है. वहीं अमेरिका में इमीग्रेशन नीति में संभावित बदलाव के खतरे देश की आईटी कंपनियों के सामने है. जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से यदि भारतीय कंपनियां अमेरिका में पर्याप्त वर्कर्स नहीं भेज पाती तो वहां सर्विस देना भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगी. वहीं सिक्का के कार्यकाल में इंफोसिस ने कंपनी की निर्भरता ऑटोमेशन और आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ा दी है क्योंकि उसे क्लाइंट द्वारा खर्चों में कमी की उम्मीद है.

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इससे पहले फाउंडर्स और कंपनी बोर्ड के विवाद को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को इंफोसिस ने कहा था कि उसने नारायण मूर्ति और अन्य फाउंडर्स से संवाद के लिए लॉ फर्म की सेवाएं ली है जिससे फाउंडर्स और कंपनी के बीच सभी संवाद पूरी पारदर्शिता के साथ सामने रखे जा सकें. बहरहाल, अब मूर्ति के बयान से साफ था कि उन्होंने बोर्ड और फाउंडर्स के बीच मची जंग को शांत करने की कवायद की थी.

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