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आज से आरबीआई की बैठक, रेपो रेट पर फिर चल सकती है कैंची?

देश की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई है, मोदी सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की कोशिश में जुटी है. हर तरफ से देश की आर्थिक सेहत सुधारने की कवायद हो रही है.

5 से 7 अगस्त तक मुंबई में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अगस्त तक मुंबई में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक

देश की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई है, मोदी सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की कोशिश में जुटी है. हर तरफ से देश की आर्थिक सेहत सुधारने की कवायद हो रही है. इसी कड़ी में सोमवार से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होनी है, ये बैठक 7 अगस्त तक चलेगी. जानकारों का कहना है कि नीतिगत दर में लगातार चौथी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है.

रेपो रेट में कटौती संभव

दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा जारी करेगा. इसमें नीतिगत दर में लगातार चौथी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेतों के बीच केंद्रीय बैंक एक बार फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है. इससे पहले जून की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में इस साल तीसरी बार कटौती की थी.

भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में

बता दें, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अगस्त से 7 अगस्त के बीच मुंबई में होगी. बैठक का समापन 7 अगस्त को होगा और इसी दिन बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी जाएगी. ऑटो इंडस्ट्री समेत तमाम उद्योग जगत रेपो रेट में आरबीआई से कटौती चाह रहा है.

उद्योग जगत उम्मीद कर रहा है कि आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) सिस्टम में नकदी की स्थिति में सुधार और ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कदम उठा सकती है.

लगातार तीन बार रेपो रेट में हुई कटौती

जानकारों की मानें तो अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए आरबीआई एक बार फिर रेपो रेट में बदलाव कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह लगातार चौथा मौका होगा, जब RBI रेपो रेट में कटौती करेगा. इससे पहले फरवरी, अप्रैल और जून में आरबीआई ने रेपो रेट में कैंची चलाई थी. फिलहाल रेपो रेट 5.75 फीसदी है, जबकि रिवर्स रेपो रेट 5.50 फीसदी है.

गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस दर पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है. रेपो रेट कम होने पर ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की दर भी कम हो जाती है. इसी प्रकार से रिवर्स रेपो रेट वह होता है, जिस दर पर आरबीआई बैंकों को उनकी जमा पर ब्याज देता है.

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