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इन 10 समस्याओं पर दें ध्यान, मिलेगी आर्थिक वृद्धि: राजन

राजन अर्थव्यवस्था के जिन खतरों की तरफ सरकार और बाजार का ध्यान आकर्षित कराया उनसे निपटने के लिए सरकार को अपनी पूरी तैयारी करनी होगी. इन्हीं मुद्दों पर इंडिया टुडे समूह के एडिटर विवेक लॉ ने रघुराम राजन से खुलकर बातचीत की.

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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने 2 जून को बाजार की उम्मीद को देखते हुए ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कमी तो कर दी लेकिन इस कटौती के साथ बाजार को भविष्य के लिए जो नसीहतें दी उससे शेयर बाजार सूचकांक दो कारोबारी दिनों में 1000 अंक नीचे गिर गया. इससे साफ है कि राजन अर्थव्यवस्था के जिन खतरों की तरफ सरकार और बाजार का ध्यान आकर्षित कराया उनसे निपटने के लिए सरकार को अपनी पूरी तैयारी करनी होगी. इन्हीं मुद्दों पर इंडिया टुडे समूह के एडिटर विवेक लॉ ने रघुराम राजन से खुलकर बातचीत की. जानिएं उन 10 बातों को जिनका जिक्र करते हुए रघुराम राजन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:

1.
रघुराम राजन ने केन्द्र सरकार के सामने अवास्तविक अपेक्षाओं की ओर इशारा किया. इसके लिए उन्होंने ‘सफेद घोड़े पर बैंठे रोनाल्ड रीगन’ के जुमले का इस्तेमाल भी किया. इसपर कहते हुए राजन ने कहा कि देश में आर्थिक वृद्धि की जिम्मेदारी सरकार की होती है क्योंकि निजी और सरकारी क्षेत्र के साथ मिलकर निवेश का काम उन्हें ही करना होता है.
2. राजन ने कहा कि रिजर्व बैंक का काम रुपए के मूल्य, महंगाई दर और व्यापक आर्थिक स्थिरता को देखते हुए विश्वास का माहौल कायम करना रहता है. इसके साथ ही केन्द्रीय बैंक सरकार की मदद कुछ ढ़ाचागत सुधारों में करता है लिहाजा अगस्त के अंत तक देश में कारोबारी तेजी लाने के लिए छोटे वित्तीय बैंकों को लाइसेंस दे दिया जाएगा.
3. केन्द्रीय बैंक के प्रमुख का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था को कई समस्याएं विरासत में मिली है और उन समस्याओं को जैसे-जैसे हम हल कर लेंगे, देश की आर्थिक वृद्धि तेज होती जाएगी. लिहाजा, देश में अटकी हुई कुछ अहम परियोजनाओं के लिए रास्ता तैयार करने की जरूरत है.
4. राजन ने कहा कि देश में पहले मनमर्जी से नीतियां बनाई जाती थी. इसका खामियाजा पूरी अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक भुगतना पड़ता है. लिहाजा, जैसे जैसे देश तरक्की के रास्ते पर जाएगा वास्तविक अपेक्षाओं का निर्माण करने वाली संस्थाएं भी विकसित होंगी.
5. मानसून कमजोर रहने से अर्थव्यवस्था के लिए दिक्कतें को बढ़ेंगी लेकिन उससे अहम बात यह है कि मानसून कमजोर रहने पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या रहती है. यदि खराब मानसून से निपटने के लिए सरकार के पास उपयुक्त नीतिगत हल हैं तो इससे होने वाले नुकसानों से बचा जा सकता है.
6. कच्चे तेल की कीमतों से भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा अंतर पड़ता है. जिस तरह से पिछले साल कीमतों में गिरावट आई, सरकार को अतिरिक्त बजट से अन्य संसाधनों को उर्जा देने में मदद मिली. हालांकि पिछले कुछ दिनों में इसकी कीमतों में इजाफा परेशानी की बात है. केन्द्रीय बैंक को उम्मीद है कि बाजार में एक बार फिर कच्चे तेल की आपूर्ति जरूरत से ज्यादा होगी और कीमतों में गिरावट से सरकार के बजट को फायदा मिलेगा.
7. ब्याज दरों को घटाने का लाभ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है. अन्य बैंक भी अपने ब्याज दरों में कटौती कर रहे हैं. हालांकि, रिजर्व बैंक की नजर ब्याज दरों को संचालित करने में बैंको पर होने वाले असर पर है. राजन ने कहा कि देश में बैंकों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए वह दिन आना जरूरी है जब सभी बैंक अपनी दरों को प्रतिस्पर्धा के आधार पर तय कर सकेंगे.
8.
यह एक बड़ा आर्थिक सुधार है. रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि जनवरी 2016 तक वह बैंकिंग के इस सुधार को लागू कर सकेंगे. राजन ने कहा कि चालू वित्त वर्श के अंत तक सभी बैंकों को सीमांत लागत मूल्य तक लाया जा सकेगा.
9. देश में भूमि विवाद हमें विरासत में मिली है. यह समस्या भी विकास से पैदा हुई है. भूमि अधिग्रहण पर चल रही बहस से साफ है कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं की दिशा में कदम उठाने के लिए जरूरी माहौल पैदा करना है. सरकार को अदिवासियों के अधिकारों के साथ-साथ उर्जा जरूरतों के लिए माइनिंग भी करना है. लिहाजा टकराव की स्थिति न बनने पाए ऐसी रणनीति बनाने की जरूरत है.
10. विदेशी पूंजी के बाहर जाने के खतरे पर रघुराम राजन ने कहा कि अमेरिका में होने वाले फैसलों का असर भारत पर पड़ेगा. हालांकि शुरुआती अस्थिरता के वक्त कुछ निवेशक अपना पैसा निकाल सकते हैं लेकिन स्थिरता वापस आने पर निवेशक उचित फैसला लेंगे. लिहाजा, हमारी कोशिश बुनियादी मजबूती को बनाए रखने पर है और उसकी से देश में आर्थिक विकास की वृद्धि सतत और तेज होगी.

 

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