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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बोले- GDP ग्रोथ में गिरावट से चिंता नहीं

प्रणब मुखर्जी का कहना है कि अब बैंकों में बड़े पैमाने पर पूंजी की जरूरत है और इसमें पैसे डालने में कुछ भी गलत नहीं है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार बैंकों को मदद की जरूरत प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार बैंकों को मदद की जरूरत

  • गिरती जीडीपी ग्रोथ को लेकर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी चिंतित नहीं
  • प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकारी बैंकों में पूंजी डालने की सख्त जरूरत

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि आर्थिक मंदी को लेकर वह चिंतित नहीं हैं क्योंकि 'जो कुछ चीजें' हो रही हैं उनके अपने प्रभाव होंगे. प्रणब मुखर्जी यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे. प्रणब मुखर्जी का कहना है कि अब बैंकों में बड़े पैमाने पर पूंजी की जरूरत है और इसमें पैसे डालने में कुछ भी गलत नहीं है.

भारतीय सांख्यिकी संस्थान के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, 'देश में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट से मैं चिंतित नहीं हूं. कुछ चीजें हो रही हैं, जिनका असर देखने को मिल रहा है.'

बैंकों को पूंजी की जरूरत 

इसके अलावा मुखर्जी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने में कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि जब 2008 में आर्थिक संकट गहराया था तब भारतीय बैंकों ने मजबूती दिखाई थी. उन्होंने कहा कि उस दौरान मैं वित्त मंत्री था और किसी भी बैंक ने पूंजी के लिए उनसे संपर्क नहीं किया था.

डेटा के साथ छेड़छाड़ लोकतंत्र के लिए खतरा

इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है. प्रणब मुखर्जी की मानें तो लोकतंत्र में डेटा की प्रामाणिकता बेहद जरूरी है. इसके साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर डेटा के साथ छेड़छाड़ होता है तो इसका विपरीत असर होता है.

गौरतलब है कि कई बार सरकार के फैसलों को लेकर प्रणब मुखर्जी की नाराजगी खुलकर सामने आई है. उन्होंने सहिष्णुता पर चली बहस में भी हस्तक्षेप किया था और देश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा की कड़े शब्दों में आलोचना की थी.

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