पैराडाइज पेपर्स खुलासे की आंच केन्द्र में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार पर भी पड़ रही है. जहां मोदी सरकार दो दिनों में देशभर में नोटबंदी की सालगिरह मनाने की तैयारी कर रही है वहीं बिहार से दो बड़े बीजेपी नेताओं के नाम का खुलासा होने के बाद उसके सामने असमंजस की स्थिति है. केन्द्र में मंत्री जयंत सिन्हा अपने नाम के खुलासे पर सफाई दे रहे हैं कि अब उनकी विदेश में बसी इन कंपनियों से कोई लेना-देना नहीं है वहीं बीजेपी सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा ने नाटकीय ढ़ंग से पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है.
रविन्द्र सिन्हा से मनीलॉन्डरिंग मामले पर सवाल किए जाने के बाद उन्होंने यह लिखते हुए चुप्पी साध ली कि फिलहाल अगले सात दिनों तक पूजा-पाठ के चलते वह कुछ भी नहीं बोल सकते. सिन्हा के लिखित वक्तव्य के मुताबिक वह एक धार्मिक अनुष्ठान के चलते अगल 7 दिनों तक मौन व्रत पर हैं लिहाजा उनके लिए कुछ भी बोलना मुमकिन नहीं है.
: BJP MP Ravindra Kishore Sinha's reaction on being asked about a news report of his security firm being linked to 2 offshore entities
— ANI (@ANI)
बीजेपी सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा पर खुलासा
बिहार से 2014 में रविन्द्र किशोर सिन्हा ने बतौर बीजेपी सदस्य राज्य सभा में शामिल हुए. रविन्द्र किशोर की खास बात है कि मौजूदा संसद में वह सबसे अमीर सदस्य हैं. पूर्व में पत्रकार रहे सिन्हा प्राइवेट सिक्योरिटी सर्विस फर्म एसआईएस (सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज) के प्रमुख हैं. इस सिक्योरिटी फर्म की विदेश में भी रजिस्टर्ड दो कंपनियां मौजूद हैं.
माल्टा रजिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक रविन्द्र सिन्हा की एक कंपनी एसआईएस एशिया पैसिफिक होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड का माल्टा में 2008 में रजिस्ट्रेशन हुआ. यह कंपनी सिन्हा की भारत स्थित कंपनी की सब्सिडियरी कंपनी है. इस विदेशी कंपनी में सिन्हा माइनॉरिटी शेयर होल्डर हैं वहीं उनकी पत्नी इस कंपनी की डायरेक्टर हैं.
आंकड़ो के मुताबिक सिन्हा की दूसरी कंपनी एसआईएस इंटरनैशनल होल्डिंग को टैक्स हैवन ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित है और उनकी पहली विदेशी कंपनी के पास इस कंपनी के 3,999,999 शेयर्स मौजूद हैं. जबकि रविन्द्र सिन्हा के पास इस कंपनी का महज एक शेयर मौजूद है. गौरतलब है कि एसआईएस इंटरनैशनल होल्डिंग में सिन्हा, उनकी पत्नी रीता किशोर सिन्हा और बेटा रितुराज किशोर सिन्हा बतौर डायरेक्टर नियुक्त हैं.
गौरतलब है कि 2014 में राज्य सभा के लिए नामांकन भरते वक्त सिन्हा ने चुनाव आयोग को दिए हलफनामें में उक्त कंपनी में अपने और अपनी पत्नी के शेयर का कोई जिक्र नहीं किया. सिन्हा ने राज्य सभा सचिवालय को इस आशय कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई थी.
हालांकि में 4 अगस्त 2017 को दी गई जानकारी के मुताबिक रविन्द्र किशोर ने उक्त सभी कंपनियों में अपने किरदार का जिक्र किया है. खासबात यह है कि चुनाव आयोग के पास मौजूद सांसद के दिल्ली और नोएडा के एड्रेस वही हैं जो माल्टा में कंपनी रजिस्टर कराने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं.