अंतरिम बजट में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के पिटारे से आम आदमी को कुछ नहीं मिला. इस अंतरिम बजट में उन लोगों को निराशा हाथ लगी जो इनकम टैक्स में छूट और होम लोन पर ब्याज में रियायत की सीमा बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे चुनाव सिर पर है सो कोई बड़ी घोषणाएं नहीं की गई. बस बखान हुआ सरकार की उपलब्धियों का. वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उम्मीद के मुताबिक अंतरिम बजट में सरकार की खूबियां गिनाई.
किसानों की बेहतरी
तस्वीर दिखाई कि सरकार आम आदमी के साथ है, हमेशा किसानों की बेहतरी का सोचती हैं और दिल तो बस गांवों में ही बसता है. बजट में शिक्षा और वित्तिय व्यवस्था सुधारने के लिए की गई कोशिशों पर भी काफी ज़ोर रहा. छात्रों के लिए नए आईआईटी शुरु करने से लेकर पढ़ाई के लिए ज्यादा से ज्यादा कर्ज मुहैया कराए जाने का जिक्र हुआ.
आर्थिक मदद का जिक्र
गांवों के हालात सुधारने के लिए बनी योजनाएं भी गिनाई गईं. कृषि की बेहतरी के लिए लागू की गई योजनाओं का भी खूब बखान हुआ. इसके तहत खाद पर सब्सिडी बढ़ाने, किसानों की कर्जमाफी और ग्रामीण इलाकों के बैंको की वित्तिय हालत सुधारने के लिए दी गई आर्थिक मदद का भी जिक्र किया गया. हालांकि प्रणब मुखर्जी ने आगे की नीतियों पर खुल कर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इशारों मे इतना जता दिया कि अगर टैक्स में छूट चाहते हैं तो यूपीए को एक बार फिर सरकार बनाने का मौका दें.
टैक्स में कमी होनी चाहिए
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने ये तो माना की टैक्स में कमी होनी चाहिए. लेकिन इस अंतरिम बजट में आम लोगों को किसी तरह की रियायत नहीं मिली. वित्त मंत्री देश के विकास दर से काफी संतुष्ट दिखे. उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी के वाबजूद हमारा विकास दर 7.1 फीसदी के करीब रहा है. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान कृषि के क्षेत्र में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि हर साल अनाज की पैदावार दस मिलयन टन बढ़ रही है. अंतरिम बजट में सरकार ने बुजुर्गों के पेंशन के लिए दो नई योजनाएं लागू करने की बात भी कही.