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ढाका से इस्तांबुल तक दौड़ेंगी हमारी मालगाड़ियां, ट्रायल रन का ऐलान जल्द

चीन की यूरोप रेल के बाद अब भारत भी उसके नक्शे-कदम पर चलने की तैयारी में है. भारतीय रेल ने ढ़ाका से इस्तानबुल तक कंटेनर माल गाड़ी दौड़ाने का प्लान बनाया है. इस प्लान के तहत भारतीय रेल पांच देश बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, ईरान और तुर्की तक 6000 किलोमीटर का सफर तय करते हुए हजारों टन माल की सप्लाई करेगी.

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अब दौड़ेगी भारत की इंटरनैशनल ट्रेन
अब दौड़ेगी भारत की इंटरनैशनल ट्रेन

चीन की यूरोप रेल के बाद अब भारत भी उसके नक्शे-कदम पर चलने की तैयारी में है. भारतीय रेल ने ढाका से इस्तांबुल तक कंटेनर मालगाड़ी दौड़ाने का प्लान बनाया है. इस प्लान के तहत भारतीय रेल पांच देश बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, ईरान और तुर्की तक 6000 किलोमीटर का सफर तय करते हुए हजारों टन माल की सप्लाई करेगी.

भारतीय रेल इस प्रोजेक्ट को ITI-DKD-Y कॉरिडोर का कोडनेम दिया है. यह मालगाड़ी ट्रेन ढाका से शुरू होकर कोलकाता-दिल्ली-इस्लामाबाद-तेहरान होते हुए इस्तांबुल पहुंचेगी. आगे चलकर इस रूट में म्यांमार के यंगून शहर को भी जोड़ दिया जाएगा. इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए भारत सरकार ने साउथ एशियन रेलवे के सभी प्रमुखों को 15-16 मार्च को हाई-लेवल मीटिंग के लिए बुलाया है.

साउथ एशियन रेलवे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान से हैं. पाकिस्तान सरकार भारत के अटारी बॉर्डर से लाहौर तक पैसेंजर ट्रेन की अनुमति देता है लेकिन किसी मालगाड़ी को अनुमति वह सुरक्षा कारणों से टालता रहा है. लिहाजा, हालांकि भारत रेल को उम्मीद है कि पाकिस्तान रेलवे इस वजह से इजाजत दे देगा कि ढाका से चलने वाली यह मालगाड़ी सिर्फ इस्लामाबाद में एक स्टॉप लेते हुए नॉनस्टॉप पाकिस्तान की सरहद से निकल जाएगी.

गौरतलब है कि इस मालगाड़ी के प्रोजेक्ट में 150 किलोमीटर का सफर ईरान के बलूचिस्तान प्रांत में तैयार नहीं हो पा रहा था. लेकिन अब ईरान रेलवे ने इस लिंक को पाकिस्तान के बॉर्डर तक पूरा कर लिया है. एशिया रेलवे के इस प्रोजेक्ट को संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में बनाया जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि इस रेल रूट से हजारों साल पुराने सिल्क रूट पर एक बार फिर कारोबार तेज हो जाएगा.

6000 किलोमीटर का सफर करने वाली इस मालगाड़ी के लिए ट्रायल रन की घोषणा मार्च में नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद की जा सकती है. भारत के नेतृत्व में होने वाली यह बैठक एशिया रेल में शामिल सभी देशों के बीच टेक्निकल और ऑपरेशनल मुद्दे पर सहमति के लिए हो रही है.

इससे पहले जनवरी में चीन रेलवे ने 12,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हुए बीजिंग से जर्मनी होते हुए लंदन तक अपनी मालगाड़ी भेजी थी. इस ट्रायल रन के बाद चीन रेलवे ने पूरे यूरोप में सस्ती माल ढ़ुलाई का विकल्प दे दिया है. 

 

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