केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है. दरअसल, सीबीडीटी के ताजा सर्कुलर में कहा गया है कि टैक्स चुकाने से जानबूझकर बचने, टैक्स रिटर्न नहीं भरने और सरकारी खजाने में 25 लाख रुपये तक टीडीएस जमा नहीं कराने के मामलों में क्रिमिनल एक्शन नहीं लिया जाएगा. इसका मतलब यह हुआ कि ऐसे मामले पर कोर्ट में नहीं जाएंगे. सीबीडीटी के इस फैसले से बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स कानूनी मुकदमेबाजी से बच सकेंगे.
सीबीडीटी की ओर से यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स के साथ ज्यादा सख्ती नहीं दिखाने को कहा था. दरअसल, बीते दिनों निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया था, 'मैंने रेवेन्यू सेक्रटरी को निर्देश दिया है कि वो यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं कि ईमानदार करदाताओं को परेशान न किया जाए और जिन्होंने मामूली या प्रक्रियात्मक उल्लंघन किया है उन पर गंभीर एक्शन न लिया जाए.'
क्या है सर्कुलर में
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीबीडीटी के सर्कुलर में लिखा है कि जिस मामले में स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की जमा नहीं कराई गई राशि 25 लाख रुपये से कम है और इसे जमा कराने में निश्चित तारीख से 60 दिन से कम का विलंब हुआ है, तो सामान्य परिस्थितियों में इसमें मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.
हालांकि आदतन चूक के मामलों में दो मुख्य आयुक्तों के कॉलेजियम या आयकर विभाग के महानिदेशक की मंजूरी से अभियोजन चलाया जा सकता है. ऐसे मामलों में आयकर कानून की धारा 276 बी के तहत कार्रवाई की जाएगी. सर्कुलर में आगे बताया गया है कि जिस मामले में जानबूझकर टैक्स चोरी की राशि या कम आय दिखाने पर कर 25 लाख रुपये या उससे कम है तो उनमें भी क्रिमिनल एक्शन नहीं लिया जाएगा.