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इन 5 कारणों के चलते 1 अप्रैल से नहीं लागू हो पाएगा GST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश के सबसे बड़े आर्थिक रिफॉर्म गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को 1 अप्रैल 2016 से लागू कराने के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में कानून में संशोधन कराना है.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश के सबसे बड़े आर्थिक रिफॉर्म गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को 1 अप्रैल 2016 से लागू कराने के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में कानून में संशोधन कराना है. विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने GST संशोधन विधेयक में ऐसे बदलावों की मांग की है जिससे माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार के लिए इस विधेयक को संसद से पास करा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो गया है.

GST संशोधन विधेयक में आ रही दिक्कतों के अलावा मानसून सत्र में ललित मोदी विवाद और मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला भी केन्द्र सरकार के लिए कड़ी चुनौती है. इन मद्दों के चलते भी मोदी सरकार के कई अहम कानूनी सुधारों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

इन पांच कारणों से GST नहीं हो पाएगा 1 अप्रैल 2016 से लागू
1. विपक्ष में बैठी कांग्रेस GST बिल के विरोध में नहीं है लेकिन उसकी सहमति कुछ शर्तों पर है. वह चाहती है कि संशोधन विधेयक में राज्यों के बीच होने वाले ट्रेड पर 1 फीसदी टैक्स लगाने के प्रस्तावित प्रावधान को हटा दिया जाए. इसके साथ ही कांग्रेस मांग कर रही है कि GST की प्रस्तावित दर को 26 फीसदी से कम करके 18 फीसदी कर दिया जाए. कांग्रेस यह भी चाहती है कि शराब, पेट्रोलियम और बिजली को GST में शामिल किया जाए. साथ ही वह पुराने बिल में कंसल्टेटिव मैकेनिज्म को दोबारा शामिल करने की मांग कर रही है. लिहाजा, मानसून सत्र में यह बिल पास कराने के लिए कांग्रेस की मांगों को मानना पड़ेगा क्योंकि संख्या के हिसाब से बिना कांग्रेस के यह बिल पास नहीं हो सकता.

2. GST के लिए संविधान में संशोधन महज पहला कदम है. GST कानून बनने के बाद इसे लागू कराने के लिए संविधान के कई हिस्सों में जरूरी संशोधन करने होंगे. इसके लिए एक बार फिर संसद के दोनों सदनों की मंजूरी लेनी होगी और सभी दलों के बीच सघन बातचीत का दौर चलेगा.

3. मौजूदा समय में सभी राज्यों का अपना VAT (वैल्यू एडेड टैक्स) कानून है जिसे GST कानून बनने के बाद राज्यों में हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके साथ ही राज्यों में पुराने टैक्स ढांचे को हटाने और नए GST ढांचे को स्थापित करने के बीच के समय में टैक्स संबंधित मामलों को हल करने के लिए प्रावधान बनाए जाएंगे.

4. राज्यों में किसी कानून को पास कराने में कई अड़चनों का सामना करना पड़ता है. केन्द्र में बने सभी कानून अंग्रेजी में बनाए जाते हैं. राज्यों से पास कराने के लिए उन्हें राज्यों की भाषा में अनुवाद कराया जाएगा जिसके बाद ही नए कानून को नोटीफाई करने की प्रक्रिया शुरू होगी. इस पूरी प्रक्रिया में अच्छा-खासा समय लगता है.

5. नए GST के तहत काम करने के लिए देशभर में ट्रेड और इंडस्ट्री को आईटी क्षेत्र में निवेश करना होगा. इसके साथ ही नए टैक्स ढांचे के सभी स्टेकहोल्डर्स को GST प्रभावी करने के पहले शिक्षित करना होगा.

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