भारत में स्थायी कारोबार नहीं रखने वाली विदेशी कंपनियों को 18.5 फीसदी न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT-Minimum Alternate Tax) से छूट देने के सरकार के फैसले से सभी विदेशी निवेशकों को पूरी राहत मिल गई है.
एमएटी से जुड़े सभी विवाद खत्म
इस सप्ताह वित्त मंत्रालय की घोषणा से एमएटी से जुड़े सभी विवाद समाप्त हो गए है, क्योंकि भारत में बिना कारोबारी उपस्थिति वाली सभी कंपनियों (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और कंपनियां ) को एमएटी से छुटकारा दे दिया गया है, चाहे उन कंपनियों के देश के साथ भारत का कर समझौता हो या न हो.
कराधान समझौते वाली कंपनियों को ही छूट
वित्त मंत्रालय ने आयकर अधिनियम-1961 की धारा 115जेबी में एक अप्रैल 2001 से संशोधित करने का फैसला किया है. इसके तहत जिन देशों के साथ भारत का दोहरा कराधान निवारण समझौता है, वहां की कंपनियों को छूट मिलेगी. यदि किसी देश के साथ भारत का कराधान समझौता नहीं है, तो जब तक वहां की कंपनियों को कंपनी कानून 2013 में भारत में पंजीकृत कार्यालय रखने से छूट न दी गई हो, उन्हें यह छूट नहीं मिलेगी.
स्थायी कारोबार नहीं होने पर ही छूट लागू
दोनों ही स्थितियों में यह छूट तभी प्रभावी होगी, जब विदेशी कंपनियों का भारत में स्थायी कारोबार नहीं हो. गौरतलब है कि इसी तरह की एक छूट एपी शाह समिति की सिफारिश पर विदेशी कोषों को इस साल एक अप्रैल से दी गई थी. अब यह छूट विदेशी कंपनियों को भी दे दी गई. एमएटी पर अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों ने छह मई को 63 करोड़ डॉलर की बिकवाली कर दी थी, जो जनवरी 2014 के बाद किसी भी एक दिन की सबसे बड़ी बिकवाली थी.