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रुकेगा पलायन! नोएडा-ग्रेटर नोएडा की 1500 यूनिट, 230 कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में शुरू होगा काम

उम्मीद है कि एनसीआर में बड़े पैमाने पर होने वाले मजदूरों का पलायन रुकेगा और अर्थव्यवस्था का पहिया थोड़ी गति पकड़ेगा. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 1,500 औद्योगिक इकाइयों और 230 निर्माण परियोजनाओं को काम शुरू करने की इजाजत दी गई है. इनसे 1.10 लाख से अधिक कामगारों को काम मिलेगा.

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कारखानों में काम शुरू करने को मिली मंजूरी
कारखानों में काम शुरू करने को मिली मंजूरी

  • नोएडा-ग्रे. नोएडा के सैंकड़ों कारखानों को काम की इजाजत
  • करीब 230 निर्माण प्रोजेक्ट में भी काम को मिली मंजूरी
  • कई वजहों से इन यूनिट्स में नहीं शुरू हो पाया था काम

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 1,500 औद्योगिक इकाइयों और 230 निर्माण परियोजनाओं (कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट) को काम शुरू करने की इजाजत दी गई है. इससे उम्मीद है कि एनसीआर में बड़े पैमाने पर होने वाले मजदूरों का पलायन रुकेगा और अर्थव्यवस्था का पहिया थोड़ी गति पकड़ेगा. इनसे 1.10 लाख से अधिक कामगारों को काम मिलेगा.

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इस वजह से नहीं मिल रही थी ढील

गौरतलब है कि लॉकडाउन के तीसरे चरण में केंद्र सरकार द्वारा कई तरह की ढील देने के बाद से ही इंडस्ट्री इस बात का दबाव बना रही थी कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की इंडस्ट्रियल यूनिट में काम शुरू करने दिया जाए. हालांकि, आसपास की सोसाइटीज में हॉटस्पॉट या कोरोना पॉजिटिव मरीजों के पाए जाने की वजह से कई जगहों पर प्रशासन ने कामकाज की इजाजत नहीं दी थी.

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जब सैमसंग जैसे बड़ी इंडस्ट्री शुरू हुई तो बाकी इंडस्ट्री की तरफ से भी यह मांग आने लगी कि उन्हें काम शुरू करने की इजाजत दी जाए. अधिकारियों के अनुसार इन औद्योगिक इकाइयों और निर्माण स्थलों पर काम शुरू होने से 1.10 लाख से अधिक कामगारों को काम मिलेगा. ये इकाइयां कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये जारी ‘लॉकडाउन’ के कारण बंद थीं.

नोएडा की 1150 इकाइयां

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु महेश्वरी ने कहा कि करीब 1,150 औद्योगिक इकाइयों को काम शुरू करने की अनुमति दी गई है. इसमें करीब 65,000 कामगार काम करते हैं. इसके अलावा 24 आवासीय परियोजनाएं (ग्रुप), 65 औद्योगिक/वाणिज्यिक निर्माण कार्य तथा 40 अन्य निर्माण परियोजनाएं शुरू करने की मंजूरी दी गई है.

गौरतलब है कि देश में 25 मार्च से ही लॉकडाउन लागू है और अब इसका तीसरा चरण चल रहा है. पहले चरण में तो कारोबार और उद्योग पूरी तरह से ठप रहे, इसकी वजह से इंडस्ट्री जगत को कई लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

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