देश में करीब 66,000 करोड़ रुपये के मकान बनकर तैयार हैं. लेकिन कोरोना संकट के दौर में अब बिल्डर्स में यह आशंका घर कर रही है कि आगे इसके खरीदार कैसे मिलेंगे? संपत्ति सलाहकार कंपनी एनारॉक ने बिल्डर्स को सलाह दी है कि उन्हें ये मकान डिस्काउंट पर बेचने चाहिए.
एनारॉक का आकलन है कि बिल्डरों के पास इस समय विभिन्न शहरों में 66,000 करोड़ रुपये के मकान बिक्री के लिए पड़े हैं जो बनकर बिल्कुल रहने लायक तैयार हो चुके हैं. एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में करीब 78,000 रेडी टू मूव मकान बिक्री के लिए खड़े हैं.
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गौरतलब है कि कोरोना की वजह से देश-दुनिया की इकोनॉमी की हालत अच्छी नहीं है. इस पूरे वित्त वर्ष में इकोनॉमी के काफी सुस्त रहने का अंदेशा है. लोगों के रोजगार, आमदनी पर संकट है, ऐसे में लोग रियल एस्टेट में निवेश कितना करेंगे, इसे लेकर संदेह बना हुआ है. इस वजह से इन तैयार मकानों के लिए खरीदार मिलना आसान नहीं है.
हालांकि रियल एस्टेट के कई जानकारों को यह भरोसा है कि आगे भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन आने वाले हैं, क्योंकि चीन से बहुत-सी कंपनियां भारत का रुख करेंगी. इस वजह से यह उम्मीद है कि भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट को तेजी मिलेगी.
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'बिल्डर्स को यह सोचना होगा कि उन्हें अपने बिकने के लिए तैयार मकानों के साथ क्या करना है. उनके पास वित्तीय दबाव को झेलने की ताकत कितनी है.'
उन्होंने कहा, 'अच्छा-खासी नकदी रखने वाले संगठित क्षेत्र के डेवलपरों के छूट देने की संभावना कम है, लेकिन ऐसे बिल्डर जिन्हें जल्दी नकदी चाहिए वह इस विकल्प को चुनेंगे. वह छूट पर या अन्य प्रोत्साहन उपायों के साथ मकानों की बिक्री कर सकते हैं.
करना चाहिए मोलभाव
पुरी ने पहली बार मकान खरीदने वाले ग्राहकों को भी सलाह दी कि वह अच्छे रेडी टू मूव घर खरीदने के लिए बिल्डरों के साथ ठीक से मोलभाव करें.
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सात शहरों में 6.44 लाख मकान तैयार
रिपोर्ट के मुताबिक में इन सात शहरों (दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे) में 6.44 लाख से अधिक तैयार मकान हैं. इनमें से करीब 12 प्रतिशत रेडी टू मूव हैं जबकि 88 प्रतिशत निर्माणाधीन.