एक्सिस बैंक के निदेशक मंडल ने बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ शिखा शर्मा का नया कार्यकाल तीन साल से घटाकर सिर्फ सात महीने कर दिया है. शिखा ने खुद ही अपने कार्यकाल में कटौती का 'चौंकाने वाला आग्रह' बैंक के बोर्ड से किया था. हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि शिखा की ओर से ऐसे अनुरोध का मकसद क्या था.
निजी क्षेत्र के इस बैंक के निदेशक मंडल का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक की सीईओ और प्रबंध निदेशक पद पर शिखा शर्मा की चौथे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठाया था. एक्सिस बैंक बढ़ती एनपीए की समस्या से जूझ रहा है.
बैंक का कहना है कि खुद शिखा शर्मा ने बोर्ड से आग्रह किया कि उनके नए कार्यकाल को घटाते हुए इस साल दिसंबर तक कर दिया जाए, यानी उन्हें तय समय से 29 महीने पहले ही पद से मुक्त कर दिया जाए. शिखा शर्मा का तीसरा कार्यकाल 31 मई 2018 को पूरा हो रहा है. वे 2009 से ही इस पद पर हैं.
एक्सिस बैंक ने शेयर बाजारों को सूचित किया है कि बोर्ड ने शिखा शर्मा को सात महीने (एक जून से 31 दिसंबर 2018 तक) के छोटे कार्यकाल का आग्रह किया है. इससे पहले पिछले साल आठ दिसंबर को बैंक ने कहा कि बोर्ड ने शिखा को एक जून 2018 से तीन साल के लिए पुनर्नियुक्ति करने का फैसला किया है.
एक्सिस बैंक की ओर से रेगुलेटरी फाइलिंग में इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि शिखा शर्मा अपने चौथे कार्यकाल को तीन साल से घटाकर 7 महीने क्यों करवाना चाहती हैं. बोर्ड के अनुसार उनके निवेदन को स्वीकार कर लिया गया है और इस बारे में आरबीआई की मंजूरी का इंतजार है.
हाल के वर्षों में एक्सिस बैंक का एनपीए बढ़कर पांच गुना हो गया है. मार्च 2015 में बैंक का एनपीए 4,110 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर मार्च 2017 में 21,280 करोड़ हो गया है. इसी दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट भी घटकर 7,357 करोड़ से घटकर 3,679 करोड़ पर आ गया है.
हालांकि, शिखा शर्मा की पुनर्नियुक्ति पर आरबीआई की मंजूरी अभी ली जानी है.