देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मास्यूटिकल्स के फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप सांघवी ने वित्त वर्ष 2018-19 में अपनी सैलरी में 99 फीसदी से ज्यादा की कटौती की है. हालांकि, इस दौरान कंपनी के मुनाफे में 27 फीसदी की अच्छी बढ़त हुई है. असल में उन्होंने पूरे साल में सिर्फ 1 रुपये की प्रतीकात्मक सैलरी ली है. इस प्रकार वह फार्मा सेक्टर में सबसे कम सैलरी लेने वाले सीईओ बन गए हैं.
इसके पिछले वित्त वर्ष यानी 2017-18 में सांघवी ने 3.36 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज लिया था. इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2018-19 में कैडिला हेल्थकेयर के एमडी शर्विल पटेल का सालाना पैकेज 25 करोड़ रुपये का, ल्यूपिन के एमडी निलेश गुप्ता का सालाना पैकज 1.9 करोड़ रुपये का और डॉ. रेड्डीज लेबारेटरीज के एमडी एवं सीईओ जीवी प्रसाद का सालाना पैकेज 12.38 करोड़ रुपये का था.
हालांकि, कंपनी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 31 मार्च, 2019 तक के वित्त वर्ष में 2.62 लाख रुपये का अनुलाभ मिला है. इस अनुलाभ में हाउस रेंट एलाउंस, लीव ट्रैवल असिस्टेंस, मेडिकल रीइम्बर्समेंट, पीएफ आदि शामिल हैं. इसके अलावा सन फार्मा में उनकी करीब 9.6 फीसदी हिस्सेदारी है जिसकी वैल्यू 11,039 करोड़ रुपये थी, एक साल पहले भी उनके शेयरों का वैल्यूएशन लगभग इतना (11,411 करोड़ रुपये) ही था. हालांकि, 31 जुलाई 2019 तक यह वैल्यूएशन घटकर 9,830 करोड़ रुपये रह गया है.
शेयरों से कमाई
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में सांघवी को शेयरों से 63.3 करोड़ रुपये का लाभांश हासिल हुआ है और इसके पिछले वित्त वर्ष में उन्हें 46.1 करोड़ रुपये का लाभांश मिला था.
सांघवी के एक रिश्तेदार सुधीर वालिया ने भी एक रुपये की सैलरी ली थी, जिन्हें हाल में पूर्णकालिक निदेशक पद से इस्तीफा देना पड़ा है.
सन फार्मा की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है, 'वित्त वर्ष 2018-19 में दिलीप सांघवी और सुधीर वालिया दोनों को एक रुपये वेतन और क्रमश: 2.62 लाख एवं 79,200 रुपये का अनुलाभ मिला है.'
वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी की समेकित शुद्ध बिक्री 10 फीसदी बढ़कर 28,686 करोड़ रुपये रही. इसके समेकित शुद्ध मुनाफे में 27 फीसदी की बढ़त हुई है. हालांकि, चौथी तिमाही के नतीजों में 52 फीसदी की गिरावट आई है. असल में इस दौरान कंपनी को अपने वितरण नेटवर्क में बदलाव के लिए 1,085 करोड़ रुपये की एकमुश्त रकम खर्च करनी पड़ी है.