केन्द्र सरकार कामकाजी महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव की अवधि को मौजूदा 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने करने की योजना पर काम कर रही है. केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक महिला और बाल कल्याण विभाग के 24 हफ्ते के मैटरनिटी लीव के प्रस्ताव पर जल्द फैसला लिया जा सकता है.
महिला और बाल कल्याण मंत्रालय का प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक केन्द्र सरकार इस आशय अपनी तैयारी में जुटी है जिससे देश की तमाम निजी कंपनियों और ट्रेड यूनियनों से इस बात पर आम राय बनाई जा सके. मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक पहले दो बच्चों के लिए 24 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलेगी और तीसरे बच्चे के लिए यह मात्र 12 हफ्तों तक सीमित रहेगी.
क्या है मौजूदा कानून
मौजूदा नियम के मुताबिक देश में कंपनियों को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव देने का प्रावधान है. हालांकि देश की कई बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस मद में अतिरिक्त छुट्टियों के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराती हैं.
देश की अहम कंपनियों में मैटरनिटी लीव का प्रावधान
उदाहरण के तौर पर देश में मल्टीनैशनल मैनेजमेंट कंसल्टिंग और टेक्नॉलजी सर्विसेज कंपनी एसेंचर डिलेवरी के बाद महिला कर्मचारियों को 5 महीने का अतिरिक्त अवकाश देती है.
इसके अलावा ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट इस मद में अपनी महिला कर्मियों को 24 हफ्तों की लीव विद सैलेरी देती है.
देश में कार्यरत ग्लोबल बैंक सिटीबैंक के साथ-साथ कई मल्टीनैशनल कंपनियां अपनी महिला कर्मचारियों को इस मद में क्रेच अलाउंस देती है.
क्यों अहम है वर्किंग क्लास के लिए यह सुधार
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन सुधारों के जरिए देश में वर्किंग क्लास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानदंड़ स्थापित करने की कोशिश में हैं. इसके साथ ही इन सुधारों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की कोशिश है कि देश के लेबर नियमों में सघन सुधार की शुरुआत की जाए जिससे देश में बड़े विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो और बड़ी संख्या में रोजगार पैदा किए जा सकें.