अब हर नई दवा प्राइस कंट्रोल के तहत आएगी. आम लोगों से किसी भी दवा के लिए अतिरिक्त रुपये न वसूले जाएं, इसके लिए ड्रग प्राइस रेगुलेटर ने दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए जरूरी कर दिया है कि वो इसका ध्यान रखें कि दवा के लिए ग्राहक से अतिरिक्त मूल्य तो नहीं वसूला जा रहा. बाजार में उपलब्ध दवाइयों के साथ नई दवाइयों पर भी यह लागू होगा. आफत में फंसी डॉक्टरों की जान
फिलहाल 374 दवाइयों के मूल्य निर्धारण सरकार ने किया है. जिसकी बिक्री 1 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ होती है. इसके अलावा कंपनियां दवाइयों में छोटे बदलाव करके उनके दाम बढ़ा देती है. इससे कंपनियां खूब पैसा बनाती हैं, क्योंकि मौजूदा नियमों के मुताबिक कंपनी नई दवाइयों के नए मूल्य निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र है. इतना ही नहीं ऐसी दवाइयों के लिए कंपनी सालाना 10 प्रतिशत मूल्य बढ़ाने के लिए भी स्वतंत्र है.