scorecardresearch
 

2जी नीलामी में 10,000 करोड़ से भी कम आमदनी

2जी स्पेक्ट्रम की बहुप्रचारित नीलामी बुधवार को समाप्त हो गई. यह बोली आमदनी के लिहाज से सरकार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी.

Advertisement
X

2जी स्पेक्ट्रम की बहुप्रचारित नीलामी बुधवार को समाप्त हो गई. यह बोली आमदनी के लिहाज से सरकार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी. इसमें आधा से भी कम स्पेक्ट्रम के लिए बोलियां प्राप्त हुईं हैं और इससे सरकारी खजाने को लक्ष्य की करीब एक तिहाई आमदनी ही हो सकेगी.

देश को 1 लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले का झटका देने वाले 2जी स्पेक्ट्रम ने फिर देशवासियों और सरकार को बड़ा झटका दिया है. उम्मीद थी कि 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकारी खजाने को 28 हजार करोड़ की आमदनी होगी लेकिन दो दिन की नीलामी के बाद सरकारी खजाने को मिली 10 हजार करोड़ से भी कम रकम आ पाई. शुरुआती गणनाओं के अनुसार सरकार को दो दिन चली इस नीलामी में कुल 10,000 करोड़ रुपये मूल्य से भी कम की बोलियां प्राप्‍त हुई हैं. उल्लेखनीय है कि 2010 में 3जी स्पेक्ट्रम के लिए 35 दिन चली नीलामी में सरकार को 67,719 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं.

Advertisement

2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी को लेकर पिछले कई महीनों से काफी चर्चा थी और सरकार जीएसएम बैंड में यह स्पेक्ट्रम बेचकर 28,000 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य लेकर चल रही थी. वीडियोकॉन तथा आइडिया ने सात सर्किलों में स्पेक्ट्रम हासिल किए हैं जबकि टेलीनार को छह सर्किलों की बोली में कामयाबी मिली है. इसी तरह एयरटेल व वोडाफोन को एक एक सर्किल में स्पेक्ट्रम मिला है. इन पांच कंपनियों में से किसी ने भी अखिल भारतीय (पैन इंडिया) स्पेक्ट्रम के लिए बोली पेश नहीं की थी. नीलामी में अखिल भारतीय स्तर पर सेवा नेटवर्क के लिए पांच मेगाहट्र्ज के स्पेक्ट्रम का आरक्षित मूल्य 14,000 करोड़ रुपये तय किया गया था.

सीडीएमए की नीलामी से टाटा टेली और वीडियोकॉन पहले ही नाम वापिस ले चुकी थी. अब हुई जीएसएम की नीलामी महज 2 दिन चली और सरकार को मिले सिर्फ 9 हजार 407 करोड़ रुपये. दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और कर्नाटक जैसे सर्किल्स के लिए तो एक बोली भी नहीं लगी. 2जी स्पैक्ट्रम की नीलामी के लिए पूरे भारत में 5 मेगाहर्ट्ज स्पैक्ट्रम का रिजर्व प्राइस 14 हज़ार करोड़ रुपये रखा गया था लेकिन बोली लगाने वाली पांचों कंपनी में से किसी ने भी पैन इंडिया स्पैक्ट्रम के लिए बोली नहीं लगाई.

कंपनियों ने आरक्षित मूल्य को काफी उंचा बता कर इसकी आलोचना की थी. संभवत: इसी कारण इस बार की स्पेक्ट्रम नीलामी में कंपनियों का उत्साह ठंडा रहा. 2010 में 3जी की नीलामी से सरकार को 67 हजार 719 करोड़ मिले थे लेकिन जिस 2जी स्पेक्ट्रम ने सरकार को झटके पर झटके दिए उसकी आमदनी उम्मीद भी पूरा नहीं कर पाई.

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement