जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026 नजदीक आ रहा है, किफायती आवास यानी सस्ते घरों को लेकर हलचल तेज हो गई है. सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर एक खास योजना तैयार की है. इसका मकसद उन परेशानियों को दूर करना है, जिनकी वजह से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर बनाना या खरीदना मुश्किल होता जा रहा है.
नीति आयोग का कहना है कि जमीन की बढ़ती कीमतों और बिल्डर्स के कम मुनाफे की वजह से नए सस्ते घरों की सप्लाई धीमी पड़ गई है. इसी को देखते हुए बजट में बड़े फैसलों की जरूरत बताई गई है.
बिल्डर्स को टैक्स में पूरी राहत का प्रस्ताव
नीति आयोग की सबसे अहम सिफारिश यह है कि किफायती आवास परियोजनाओं पर काम करने वाले बिल्डर्स को 100% टैक्स छूट दी जाए. आयोग का मानना है कि इससे निजी कंपनियां दोबारा इस सेक्टर में दिलचस्पी लेंगी. इसके साथ ही, आयकर कानून की धारा 80-आईबीए को फिर से लागू करने की भी मांग की गई है. यह नियम 2016 से 2022 तक लागू था और इसके जरिए बिल्डर्स को टैक्स में बड़ी राहत मिलती थी. अगर यह प्रावधान वापस आता है, तो निर्माण लागत का दबाव कम होगा और नए प्रोजेक्ट्स तेजी से शुरू हो सकेंगे.
यह भी पढ़ें: घरों के दाम आसमान पर, 8 बड़े शहरों में सेल घटी, दिल्ली-NCR में भारी गिरावट
घर खरीदने वालों के लिए लोन होगा आसान
नीति आयोग ने घर खरीदने वालों को भी राहत देने की बात कही है. आयोग का सुझाव है कि सरकारी गारंटी वाली होम लोन योजना के तहत लोन की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये की जाए. इससे आर्थिक रूप से कमजोर और कम आय वाले परिवारों को बैंक से लोन लेना आसान होगा. इसके अलावा, नेशनल हाउसिंग बैंक को टैक्स-फ्री बांड जारी करने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी है, ताकि बिल्डर्स को कम ब्याज पर पैसा मिले और इसका फायदा सीधे घर खरीदारों तक पहुंचे.
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन खर्च घटाने की मांग
नीति आयोग का मानना है कि घर की कीमत सिर्फ निर्माण लागत से नहीं, बल्कि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन जैसे खर्चों से भी काफी बढ़ जाती है. इसी वजह से आयोग ने सुझाव दिया है कि अगर जमीन का इस्तेमाल सिर्फ सस्ते घर बनाने के लिए हो रहा है, तो लैंड यूज बदलने की फीस माफ की जाए. साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 और अन्य किफायती आवास योजनाओं के तहत बनने वाले घरों पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट देने की भी सिफारिश की गई है.
यह भी पढ़ें: रियल एस्टेट में टूटा रिकॉर्ड, ऑफिस सेक्टर में निवेश हुआ दोगुना, बेंगलुरु-मुंबई में जमकर बरसा पैसा
निवेशकों और REITs को भी आकर्षित करने की तैयारी
नीति आयोग ने यह भी माना है कि किफायती आवास को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ सरकारी पैसा काफी नहीं है. इसलिए आयोग ने सुझाव दिया है कि इस सेक्टर से जुड़े रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) में निवेश करने वालों को टैक्स में राहत दी जाए. इसमें किराये से होने वाली आय और निवेश से मिलने वाले मुनाफे पर कर छूट देने की बात कही गई है. आयोग का मानना है कि अगर REITs के जरिए लंबे समय का निवेश बढ़ता है, तो बिल्डर्स को स्थायी और सस्ता फंड मिलेगा और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना सस्ते घरों की सप्लाई बढ़ाई जा सकेगी.
बजट 2026 बन सकता है बड़ा मोड़
नीति आयोग का मानना है कि अगर टैक्स में राहत, सस्ता कर्ज और कम सरकारी शुल्क जैसे प्रस्ताव बजट 2026 में लागू होते हैं, तो सस्ते घरों की कीमतों में कमी आ सकती है. इससे न सिर्फ लाखों लोगों का घर का सपना पूरा होगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इन सुझावों को बजट में जगह देती है या नहीं.