अमेरिका के ह्यूस्टन में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेगा इवेंट 'हाउडी मोदी' होने जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि इस कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी होंगे. पीएम मोदी और ट्रंप की इस जुगलबंदी पर दुनिया की नजरें टिकी हैं.
दरअसल अमेरिका दौर से पहले पीएम मोदी ने एक बड़ा दांव चल दिया है. शुक्रवार को जिस तरह से अचानक मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का ऐलान किया, इसके कई मायने हैं. ट्रंप से मुलाकात से पहले पीएम मोदी ने एक तरह अमेरिका को अपना इरादा बता दिया है.
अब जब बातचीत की टैबल में मोदी और ट्रंप आमने-सामने होंगे, तो पूरी उम्मीद है कि एक मुद्दा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का भी होगा. क्योंकि अभी तक एशिया में ज्यादा कॉरपोरेट टैक्स होने की वजह से अमेरिका भारत के मुकाबले चीन को तरजीह दे रहा था. लेकिन अब पीएम मोदी ने बाजी पलट दी है.
बता दें, लंबे अरसे अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के मोर्चे पर जंग छिड़ी है. दोनों एक-दूसरे पर धमकी देने के साथ-साथ इंपोर्ट ड्यूटी थोप रहे हैं. पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी कंपनियां चीन से बाहर निकलकर भारत जाना चाहती हैं.
वहीं अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा कंपनियों के लिए बेस कॉरपोरेट टैक्स रेट को 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया है और नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 25 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है. 15 फीसदी टैक्स के दायरे में 1 अक्टूबर 2019 के बाद स्थापित होने वाली कंपनियों आएंगी.
कॉरपोरेट टैक्स में इस कटौती के साथ ही भारत अब कंपनियों पर लगने वाले टैक्स की वैश्विक औसत 23.79% के करीब आकर खड़ा हो गया है. एशिया में कंपनियों पर लगे वाले कॉरपोरेट टैक्स का औसत 21.09 फीसदी है. ऐसे में, अब चीन का रुख करने वाली कंपनियों के लिए भारत आकर्षक डेस्टिनेशन हो जाएगा.
कंपनियों को लुभाने के लिए पिछले साल थाइलैंड ने कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर 10 फीसदी कर दिया था. जिस वजह से चीन से कई कंपनियां थाइलैंड शिफ्ट हो गईं. वहीं वियतनाम में कॉरपोरेट टैक्स 15 फीसदी के करीब है.
एक आंकड़े के मुताबिक एशिया में फिलहाल कॉरपोरेट टैक्स औसतन 21.9 फीसदी है. जबकि यूरोपीय यूनियन (EU) औसतन 21.16 फीसदी है. वहीं ग्लोबल की बात की जाए तो यह आंकड़ा 23.79 फीसदी का बैठता है. ऐसे में आने वाले दिनों में भारत दुनियाभर के निवेशकों के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है.
भारत में कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ने वाला है. क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक युद्ध की वजह से कई अमेरिकी कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाहती हैं. अभी तक तो कॉरपोरेट टैक्स ज्यादा होने की वजह से कंपनियां भारत की तरह नहीं देख रही थीं. लेकिन अब तस्वीर बदल सकती है.
गौरतलब है मोदी सरकार का पूरा फोकस 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की तरफ है. इससे पहले 23 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर बजट में बढ़े हुए सरचार्ज को वापस लेने का ऐलान किया था. कंपनियं पर लगने वाले टैक्स रेट में कटौती से सरकारी खजाने पर करीब 1.45 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा.