वैसे डिफॉल्टर शब्द का कोई शाब्दिक अर्थ नहीं है. इसका इस्तेमाल अलग-अलग संदर्भ में किया जाता रहा है. होम लोन डिफॉल्टर के लिए अलग नियम हैं, ऑटो लोन डिफॉल्टर के लिए अलग नियम होते हैं. जबकि पर्सनल लोन के लिए अलग नियम होता है. (Photo: getty)
आम परिभाषा में कहें तो अगर लोन लेने वाला शख्स लगातार तीन ईएमआई समय पर नहीं चुकाता है तो बैंक उसे एक सिंपल नोटिस भेजता है. अगर ग्राहक उसका कोई जवाब नहीं देता है तो फिर बैंक एक लीगल नोटिस भेजता है.
अगर इसके बाद भी अगर बैंक को जवाब नहीं मिलता है तो वो ग्राहक को डिफॉल्टर की कैटेगरी में डाल देता है. इसके बाद बैंक दो नोटिस भेजता है, इन दोनों के भी जवाब नहीं मिलने पर बैंक के पास अधिकार होता है कि वह ग्राहक की प्रॉपर्टी नीलाम कर सकता है. (Photo: getty)
दरअसल जब आप एक बार लोन डिफॉल्टर की कैटेगरी में आ जाते हैं, तो बैंक आपकी प्रॉपर्टी को अपने कब्जे में लेने का प्रोसेस शुरू कर देता है. बैंक आपकी प्रॉपर्टी को कब्जे में लेने के बाद लोन की रकम निकालने के लिए प्रॉपर्टी की नीलामी करता है. ऐसा होने पर न सिर्फ आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है, बल्कि इसके बाद भविष्य में किसी बैंक से लोन लेना आपके लिए मुश्किल हो जाता है. (Photo: getty)
वाहन लोन डिफॉल्टर के लिए नियम
अगर लोन लेकर वाहन खरीद है और समय पर ईएमआई नहीं भर पाए तो, बैंक ऐसे ग्राहक को डिफॉल्टर बना कर देता है. डिफॉल्टर घोषित करने के बाद बैंक ग्राहक के वाहन को भी अपने कब्जे में ले लेता है. साथ ही ऐसे ग्राहक को कभी भी कोई बैंक लोन नहीं देता. क्योंकि डिफॉल्टर बनते ही क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है.
इसलिए एक अगर आपने एक बाइक भी लोन पर ली है तो उसका पेमेंट सही समय पर कर
दें, ताकि आपके ऊपर डिफॉल्टर का धब्बा ना लगे. अगर बाइक लोन पर भी
डिफॉल्टर घोषित किए जाने के बाद आप बैंक से किसी भी तरह का लोन नहीं ले
पाएंगे. यानी फ्यूचर में आप घर, कार या फिर व्यापार के लिए लोन बैंक से
नहीं मिलेंगे.
आरबीआई के नियमों के अनुसार अगर किसी भी तरीके से ग्राहक 90 दिनों तक ईएमआई का भुगतान नहीं कर पाते हैं तो फिर डिफॉल्टर लोन भरना होता है. ऐसे ग्राहक एनपीए हो जाते हैं यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट. इसके बाद, कस्टमर को नोटिस दिया जाता है और उससे एक बार में ही पिछली सभी ईएमआई को भरने को कहा जाता है. (Photo: getty)
लेकिन अगर इसके बाद भी पेमेंट नहीं होता है तो फिर मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है. पांच महीने तक EMI नहीं भर पाने की स्थिति में पहले नोटिस को देने के बाद, अगर दो महीने तक कुछ नहीं होता है तो फिर मामला कोर्ट से निपटा जाता है. (Photo: getty)
विलफुल डिफॉल्टर
रिजर्व बैंक की परिभाषा के मुताबिक विलफुल डिफॉल्टर उसे कहते हैं जो कर्ज चुकाने की क्षमता के बावजूद किसी बैंक का कर्ज न वापस कर रहा हो. इसमें वे लोग भी शामिल होते हैं, जिन्होंने मिले कर्ज की रकम को जिस काम के लिए लिया था उसमें लगाने की जगह कहीं और लगा दिया या उसे खर्च नहीं किया. (Photo: getty)