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उबर के CEO ने मोदी सरकार की श्रम नीतियों की जमकर तारीफ की, कहा-दुनिया को फॉलो करना चाहिए 

उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने खासकर श्रमिकों के मामले में मोदी सरकार की नीतियों की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत ने ऐसी कई नीतियां अपनाई हैं, जिनकी दुनिया को अनुसरण करने की जरूरत है. 

Uber के CEO दारा खोसरोशाही Uber के CEO दारा खोसरोशाही
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उबर के सीईओ हैं दारा खोसरोशाही
  • एक अंग्रेजी अखबार में लिखा लेख
  • भारत की नीतियों की जमकर प्रशंसा की

ऐप बेस्ड टैक्सी ​सर्विस की बहुराष्ट्रीय कंपनी उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने खासकर श्रमिकों के मामले में मोदी सरकार की नीतियों की जमकर तारीफ की है. एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख में उन्होंने कहा कि भारत ने कई ऐसी नीतियां अपनाई हैं, जिनकी दुनिया को अनुसरण करने की जरूरत है. 

भारत के सामने बड़ी चुनौती है 

दारा ने आर्थिक अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में लिखे आलेख में कहा कि साल 2030 तक भारत सरकार को 6 करोड़ नए कामगारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे. यह एक बड़ी चुनौती है. सात साल पहले भारत में लॉन्च हुआ उबर लाखों भारतीयों को रोजगार दे चुका है. लेकिन कोविड महामारी की वजह से जून तिमाही में 23.9 फीसदी की गिरावट आयी है. 

दुनिया में अग्रणी देशों में भारत 

उन्होंने कहा कि भारतीय नीति नियंता जो सामाजिक सुरक्षा कोड (CoSS) पारित कर रहे हैं वह काफी महत्वपूर्ण है. इसमें इस बात पर जोर दिया है कि सभी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा दी जाए, न कि सिर्फ कर्मचारियों को. भारत उन पहले देशों में है जो देशभर में कामगारों और Gig एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के फायदे और संरक्षण दे रहा है.  

गौरतलब है कि गिग का मतलब होता है अस्थायी, लचीले रोजगार जिसमें कंपनियां स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर और फ्रीलांसर रखने पर जोर देती हैं. गिग इकोनॉमी में ऐसे अस्थायी कामगारों के लिए अवसर पैदा करने पर ज्यादा जोर होता है. जैसे उबर बड़ी संख्या में ड्राइवर्स के लिए रोजगार का सृजन कर रही है. 

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उबर के सीईओ ने कहा कि करीब 45 करोड़ भारतीय कामगारों को जीवन, विकलांगता, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ तथा ओल्ड एज में संरक्षण जैसे बुनियादी सुरक्षा और CoSS के तहत उपाय वास्तव में भारत के लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाला है. 

बदले रोजगार के परंपरागत तरीके 

उन्होंने कहा कि भारत सरकार उन पहले कुछ देशों में है जो रोजगार के परंपरागत तंत्र में बदलाव करते हुए पूर्णकालिक और स्वतंत्र कार्य जैसे दोहरे विकल्प देने की ओर बढ़ रही है. पहले रोजगार स्थायी था लेकिन लचीलापन नहीं, इसी तरह अगर स्वतंत्र काम करने वाले थे तो उन्हें कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं. लेकिन अब दोनों फील्ड के लोगों को उनकी वाजिब जरूरतों को मुहैया कराया जा रहा है. 

आयुष्मान भारत पर भरोसा 

उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा, 'हम ड्राइवरों को जरूरी सुरक्षा और संरक्षण देने को तैयार हैं और भारत सरकार के सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान करना हमारी प्राथमिकता है.' 

उन्होंने उम्मीद जताई कि CoSS के तहत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से ज्यादा से ज्यादा ड्राइवरों को आयुष्मान भारत जैसी इमरजेंसी चिकित्सा सुविधाओं का फायदा मिलेगा. 

 

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