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मंदी पर सरकार ने भी लगाई मुहर, दूसरी तिमाही में -7.5 फीसदी की ग्रोथ

वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी यानी सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में 7.5 फीसदी रही है. वित्त वर्ष की पहली यानी जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 24 फीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है.

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GDP
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में 7.5 फीसदी रही
  • जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में करीब 24 फीसदी की गिरावट
  • लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को मंदी माना जाता है

कोरोना वायरस संकट के बीच 27 नवंबर यानी शुक्रवार को दूसरी बार जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े आ गए हैं. वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी यानी सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में 7.5 फीसदी रही है. वित्त वर्ष की पहली यानी जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 24 फीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है.

अगर पहली तिमाही से तुलना करें तो अर्थव्यवस्था को रिकवरी मिली है लेकिन इसके बावजूद निगेटिव ग्रोथ इकोनॉमी के लिए सही संकेत नहीं हैं. लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को तकनीकी तौर पर मंदी माना जाता है. कहने का मतलब ये है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर मंदी को स्वीकार कर लिया है. आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2020-21 की सितंबर तिमाही में भारतीय इकोनॉमी अनलॉक के चरण से गुजर रही थी. मतलब ये कि सख्त लॉकडाउन के बाद इकोनॉमी को धीरे धीरे खोला जा रहा था.

सरकार ने आंकड़ों पर क्या कहा

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने आंकड़ों पर कहा कि हमारी इकोनॉमी बेहतर कर रही है. कोरोना से पहले इकोनॉमी ने बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन आपदा की वजह से सुस्ती आई. यही वजह है कि पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में करीब 24 फीसदी पर चला गया था. पहली तिमाही के मुकाबले अच्छी रिकवरी है. उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 0.6 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र में 3.4 फीसदी की वृद्धि आई है.

रिजर्व बैंक का क्या था अनुमान
रिजर्व बैंक ने सितंबर तिमाही में जीडीपी में 8.6 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था. केयर रेटिंग्स ने सितंबर तिमाही में जीडीपी में 9.9 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था. कहने का मतलब ये है कि इस लिहाज से इकोनॉमी ने बेहतर प्रदर्शन किया है. इस बात की उम्मीद की जा रही है कि तीसरी और चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था में मामूली सुधार हो सकता है. आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2019-20 की सितंबर तिमाही में जीडीपी में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. 

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कोर सेक्टर की बात करें तो अक्टूबर में ग्रोथ -2.5 फीसदी रही, जो सितंबर के 0.8% के मुकाबले कम है. कोयला, कच्‍चा तेल, उर्वरक, स्‍टील, पेट्रो रिफाइनिंग, बिजली और नेचुरल गैस उद्योगों को किसी अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद माना जाता है. यही आठ क्षेत्र कोर सेक्‍टर कहे जाते हैं.

क्या होती है मंदी

अर्थव्यवस्था में मान्य परिभाषा के मुताबिक अगर किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही निगेटिव में रहती है यानी ग्रोथ की बजाय उसमें गिरावट आती है तो इसे मंदी की हालत मान लिया जाता है. यूं समझ लीजिए कि तकनीकी तौर पर देश आर्थिक मंदी में फंस चुका है. क्योंकि इस वित्त वर्ष की लगातार दो तिमाही में जीडीपी निगेटिव में है.

बाजार में रही सतर्कता 
जीडीपी आंकड़ों से पहले शेयर बाजार में निवेशक सतर्कता बरतते नजर आए. बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 110.02 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 44,149.72 पर बंद हुआ.इसी तरह एनएसई का निफ्टी 18.05 अंक यानी 0.14 प्रतिशत फिसलकर 12,968.95 पर बंद हुआ.  

 

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