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अगले महीने से और बढ़ जाएगी EMI, महंगाई से भी राहत की नहीं कोई गुंजाइश

रिजर्व बैंक ने अप्रैल की बैठक में फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए महंगाई के प्रोजेक्शन को 1.2 फीसदी बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया था. इसके साथ ही सेंट्रल बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) का फोरकास्ट 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था.

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अभी और बढ़ेगी ब्याज दरें अभी और बढ़ेगी ब्याज दरें
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ब्याज दर बढ़ा रहे हैं तमाम सेंट्रल बैंक
  • कई देश रिकॉर्ड महंगाई से परेशान

इस महीने की शुरुआत में रिजर्व बैंक के अचानक रेपो रेट बढ़ने (RBI Rate Hike) के बाद होम लोन (Home Loan), कार लोन (Car Loan), पर्सनल लोन (Personal Loan) महंगे होने लग गए हैं. आने वाले महीनों में लोन और महंगा हो सकता है, जिससे लोगों के ऊपर ईएमआई (EMI) का बोझ भी बढ़ेगा. इसके साथ ही हाल-फिलहाल में लोगों को महंगाई से भी राहत मिलने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है. ऐसा माना जा रहा है कि जून महीने की एमपीसी बैठक (MPC Meeting) में रिजर्व बैंक (RBI) न सिर्फ रेपो रेट को और बढ़ाएगा, बल्कि महंगाई के प्रोजेक्शन को भी ऊपर खिसकाएगा.

अप्रैल में भी बढ़ा था महंगाई का प्रोजेक्शन

रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े सूत्र के हवाले से बताया है कि रिजर्व बैंक जून की मौद्रिक नीति समिति बैठक में फाइनेंशियल ईयर 2022-23 (FY23) के लिए महंगाई का प्रोजेक्शन बढ़ा सकता है. रिजर्व बैंक ने अप्रैल की बैठक में फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए महंगाई के प्रोजेक्शन को 1.2 फीसदी बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया था. इसके साथ ही सेंट्रल बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) का फोरकास्ट 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था. इसके बाद मई महीने की शुरुआत में रिजर्व बैंक ने एक आपात बैठक की और रेपो दर 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी करने का ऐलान किया.

आईएमएफ का इतना है अनुमान

मामले से जुड़े सूत्र ने बताया कि जून में रिजर्व बैंक निश्चित तौर पर महंगाई का अनुमान बढ़ाएगा, क्योंकि सेंट्रल बैंक मई की आपात बैठक में ऐसा नहीं करना चाहता था. हालांकि सूत्र ने यह नहीं बताया कि महंगाई के अनुमान को कितना बढ़ाया जाएगा, पर उसने ये जरूर कहा कि रिजर्व बैंक की मौजूदा राय भारत के लिए आईएमएफ (IMF) के 6.1 फीसदी महंगाई अनुमान के आस-पास है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 06 जून से 08 जून के दौरान होने वाली है.

कोरोना के चलते सस्ता हुआ था कर्ज

रिजर्व बैंक ने कोरोना महामारी के असर को कम करने और इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए साल 2020 में रेपो रेट को 1.15 फीसदी कम किया था. उसके बाद से रेपो रेट 4 फीसदी के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बना हुआ था. इस महीने की शुरुआत में करीब 2 साल बाद रेपो रेट को बदला गया और करीब 4 साल बाद इसे बढ़ाया गया. अब रिजर्व बैंक चाहता है कि कोरोना महामारी के कारण जितनी कटौती की गई थी, अब रेपो रेट को वापस उतना बढ़ा दिया जाए. बदले हालात में रिजर्व बैंक यह काम जल्द से जल्द करना चाहता है. इस बात से यह तो साफ है कि आने वाले समय में कर्ज का ब्याज दनादन बढ़ने वाला है.

अभी इतने हाई पर है महंगाई

महंगाई की बात करें तो मार्च में यह 17 महीने के उच्च स्तर 7 फीसदी पर पहुंच गई. यह आरबीआई के टोलरेंस बैंड 2-6 फीसदी के अपर लिमिट से ऊपर है. खुदरा महंगाई लगातार तीन महीने से रिजर्व बैंक के टोलरेंस लेवल के दायरे से ज्यादा है. अप्रैल में भी खुदरा महंगाई में नरमी आने की गुंजाइश नहीं दिख रही है. यूक्रेन संकट शुरू होने से पहले रिजर्व बैंक को लग रहा था कि खुदरा महंगाई मार्च में अपने पीक पर रहेगी. अप्रैल से इसमें ढलान आने लगेगी और यह धीरे-धीरे घटकर 4 फीसदी पर आ जाएगी. बदले हालात में अब महंगाई के फिलहाल कम होने की कोई गुंजाइश नहीं है. इसी कारण रिजर्व बैंक समेत तमाम सेंट्रल बैंक इकोनॉमी में हर संभव डिमांड को समाप्त करने में लगे हुए हैं.

 

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