नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) घोटाले से परेशान हजारों छोटे निवेशकों को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को राहत दी है. कोर्ट ने उन निवेशकों को पैसा वापस करने को कहा है जिनकी फंसी हुई रकम 2 से 10 लाख रुपये के बीच है.
गौरतलब है कि साल 2013 में हुए इस डिफॉल्ट केस में 6445 निवेशकों के करीब 5600 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं. स्पेशल महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंट्रेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (MPID) एक्ट के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस.एस. शिंदे और मनीष पिटाले की बेंच ने अपने 35 पेज के आदेश में कहा, 'इस कानून में छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा पर ध्यान रखा गया है, क्यों आमतौर पर ऐसे घपलों में छोटे निवेशकों को काफी नुकसान होता है.'
क्या था मामला
NSEL घोटाले के मामले में मुंबई के MRA मार्ग पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराधा शाखा मामले की जांच करा रही थी. लेकिन MPID एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक इस केस को निर्धारित कोर्ट में भेजा गया. महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक सक्षम अथॉरिटी की नियुक्ति की और उसके द्वारा कई एसेट की बिक्री की गई. इससे मिले फंड को अथॉरिटी के खाते में जमा किया गया.
इस तरह हासिल रकम को निवेशकों में बांटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने MPID कोर्ट से संपर्क किया था. महाराष्ट्र सरकार इसे निवेश हुए के रकम के अनुपात में बांटना चाहती थी, लेकिन MPID कोर्ट ने सभी निवेशकों में समान अनुपात में बांटने का आदेश दिया. इस आदेश के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार हाईकोर्ट में गई थी. हाईकोर्ट ने MPID के आदेश को पलट दिया.
NSEL इनवेस्टर्स एक्शन ग्रुप ने राज्य सरकार की याचिका का विरोध किया था और यह मांग की थी कि छोटा हो या बड़ा सभी तरह के निवेशकों में रकम को समान तरीके से वितरित किया जाए. लेकिन हाईकोर्ट इससे सहमत नहीं दिखा. कोर्ट के आदेश के बाद अब अगले तीन महीनों में यह पैसा निवेशकों में वितरित किया जाएगा.
क्या था घोटाला
साल 2013 में उजागर हुए NSEL घोटाले के मामले में नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड द्वारा पेमेंट डिफॉल्ट का मामला सामने आया था. फॉरवर्ड मार्केट कमीशन ने NSEL को कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करने से रोका जिसके बाद यह घोटाला उजागर हुआ. इसकी वजह से जुलाई 2013 में स्पॉट एक्सचेंज को बंद करना पड़ा. ब्रोकर्स ने निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच देकर NSEL के उत्पाद बेचे थे. स्पॉट एक्सचेंज में माल को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था और वेयरहाउस के फर्जी रिसीट दिखाए गए थे.