शैली इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स के शेयरों (Shaily Engineering Plastics Share) ने पिछले पांच सालों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है और निवेशकों को मालामाल किया है. सटीक प्लास्टिक इंजीनियरिंग कंपनी का यह शेयर, 15 जनवरी, 2021 को 156 रुपये पर था , लेकिन मौजूदा सत्र में बढ़कर 2,200 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया है. इस अवधि में यह शेयर 1300 फीसदी चढ़ा है.
एक महीने में शेयर में 8.60% की गिरावट आई है, जिसमें से 3.57% की गिरावट एक सप्ताह में हुई है. शुकवार को यह शेयर 1.13% चढ़कर 2,156.80 रुपये पर बंद हुए. कंपनी का मार्केट कैप 9880.57 करोड़ रुपये रहा. मल्टीबैगर स्टॉक ने दो वर्षों में 575% और तीन वर्षों में 605% की तेजी दिखाई है.
स्टॉक ने पिछले साल 17 नवंबर को 2799 रुपये का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर छुआ था. 19 फरवरी, 2025 को 1304.65 रुपये के 52 सप्ताह के न्यूनतम स्तर से स्टॉक में 64.79% की तेजी दिखाता है. यह शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से भी नीचे आ चुका है, जो यह दिखाता है कि शेयर करेक्शन मोड में है.
तकनीकी लेवल पर कैसा है ये शेयर?
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, शैली इंजीनियरिंग का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 29.5 है, जो दर्शाता है कि शेयर ओवरसोल्ड क्षेत्र में कारोबार कर रहा है. शैली इंजीनियरिंग के शेयर 10 दिन, 20 दिन, 30 दिन, 50 दिन और 100 दिन के मूविंग एवरेज से नीचे, लेकिन 150 दिन और 200 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर कारोबार कर रहे हैं.
40000 रुपये का टारगेट
मार्च 2025 की तिमाही के अंत में कंपनी पर कर्ज का बोझ कम था. इसका ऋण-इक्विटी अनुपात 0.38 था. आमतौर पर 1 से कम का अनुपात किसी कंपनी के लिए सुरक्षित माना जाता है. वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने इस शेयर के लिए 4,000 रुपये का टारगेट सेट किया है.
यूबीएस को शैली के शेयरों में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है. हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-28 में प्रति शेयर आय में 75% की वृद्धि दर रहेगी. 4,000 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ खरीदें रेटिंग दी है. ब्रोकरेज फर्म ने शैली की पेटेंट प्राप्त तकनीक को आगामी जेनेरिक जीएलपी-1 थेरेपी के लॉन्च के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बताया है, जो फिक्स्ड-डोज और ऑटो-इंजेक्टर पेन के लिए है.
क्यों इतना यहां तक जा सकता है ये शेयर?
भारत, कनाडा और ब्राजील में जीएलपी-1 (सेमाग्लूटाइड) का पेटेंट 2026 में समाप्त होने वाला है, ऐसे में यूबीएस को एक बड़ा अवसर दिखाई दे रहा है. यूबीएस ने कहा कि भारत, कनाडा और ब्राजील समेत प्रमुख बाजारों में जीएलपी-1 (सेमाग्लूटाइड) का पेटेंट 2026 में समाप्त होने वाला है. हमारा मानना है कि इन क्षेत्रों में 2030 तक 550-600 मिलियन उपकरणों का कुल संभावित बाजार है या इससे 80-85 अरब रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है.
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने का कहना है कि जेनेरिक जीएलपी-1 के लिए 23-24 वैश्विक फार्मा कंपनियों के साथ समझौता किया है, जिसका अर्थ है कि इन तीन बाजारों में उसकी 50-60% हिस्सेदारी है. फर्म ने आगे कहा कि पेटेंट तकनीक और नियामक आवश्यकताओं के कारण प्रवेश बाधाएं बहुत अधिक हैं, जिससे फार्मा कंपनियों के लिए इंजेक्टर विक्रेताओं को बदलना मुश्किल हो जाता है.
(नोट- यहां बताया गया टारगेट ब्रोकरेज के अपने विचार हैं. aajtak.in इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता है. किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)