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भारत में घटी LPG खपत... 13% की गिरावट, Hormuz टेंशन का असर

US-Iran War के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तमाम देशों में तेल-गैस संकट देखने को मिला है. इस बीच भारत में एलपीजी की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और ये 13 फीसदी तक घट गई है.

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देश में एलपीजी खपत में आई तगड़ी गिरावट. (Photo: File/ITG)
देश में एलपीजी खपत में आई तगड़ी गिरावट. (Photo: File/ITG)

मिडिल ईस्ट में युद्ध थमा है, लेकिन होर्मुज को लेकर टेंशन अभी भी जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान Hormuz Strait के जरिए अमेरिका या दुनिया को ब्लैकमेल नहीं कर सकता, तो Iran ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के सिर्फ 24 घंटे शनिवार को अपना रुख बदल दिया और IRGC ने फिर से अपनी पकड़ मजबूत कर दी और आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी. 

वेस्ट एशिया संघर्ष के चलते लंबे समय से जारी होर्मुज टेंशन से दुनिया के कई देशों में तेल-गैस का संकट गहरा गया था. भारत की बात करें, तो यहां भी खासतौर पर एलपीजी क्राइसिस देखने को मिला. इसके असर का एक उदाहरण ये है कि LPG Supply में रुकावट के चलते एलपीजी की खपत मार्च में 13 फीसदी तक घट गई है. 

मार्च में इतनी रही एलपीजी खपत
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से सप्लाई से जुड़ी रुकावटों के चलते घरेलू रसोई गैस और कमर्शियल एलपीजी यूजर दोनों प्रभावित हुए. भारत में खाना पकाने वाली गैस एलपीजी की खपत मार्च में 13 फीसदी तक कम हो गई. March LPG Consumption 2.379 मिलियन टन रही, जो पिछले साल समान अवधि में खपत 2.729 मिलियन टन की तुलना में 12.8 फीसदी कम है.

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आयात पर निर्भरता का असर
भारत अपनी LPG जरूरतों का करीब 60 फीसदी आयात करता है और इसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से आता है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच भीषण युद्ध के बाद यह स्ट्रेट बंद हो गया था, जिससे Oil-LNG-PNG संकट गहरा गया था. सऊदी अरब और यूएई से आपूर्ति बाधित हुई और सरकार ने घरेलू एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए Commercial LPG Cylinder की आपूर्ति में कटौती कर दी. इससे होटलों और रेस्टोरेंट बिजनेस को तगड़ा झटका लगा. 

मार्च में बिके इतने LPG सिलेंडर
ऑयल मिनिस्ट्री के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, मार्च महीने में घरेलू उपभोक्ताओं को बेचे गए एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में 8.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद यह घटकर 22 लाख टन रह गई, जबकि नॉन-डोमेस्टिक यूजर्स को बेचे गए सिलेंडरों की संख्या में करीब 48 फीसदी की कमी आई. इसके अलावा थोक एलपीजी की बिक्री में सबसे बड़ी 75.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. 

हालांकि, होर्मुज संकट के बीच एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने के बीच सरकार ने कमी को पूरा करने के लिए तमाम बड़े कदम उठाए हैं. इनमें सबसे अहम रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन से कच्चे माल को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश है. इसके अलावा सिलेंडर बुकिंग की समयसीमा को बढ़ाया गया, तो वहीं पीएनजी कनेक्शन (PNG Connection) बांटने पर सरकार का जोर रहा. 

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पेट्रोल-डीजल की बिक्री बढ़ी
US-Iran War से सिर्फ एलपीजी ही नहीं, बल्कि Petrol-Diesel पर भी असर पड़ा है. होर्मुज टेंशन के बीच देश में गुजरात से मध्यप्रदेश तक पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने के लिए भारी भीड़ के नजारे देखने को मिले. रिपोर्ट्स की मानें, तो देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में बड़ा उछाल आया है. पेट्रोल की बिक्री 7.6 फीसदी बढ़कर 37 लाख टन हो गई, वहीं डीजल की खपत 8.1 फीसदी उछलकर 87 लाख टन हो गई.

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