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हर्ड इम्युनिटी, इकोनॉमी में सुधार के लिए रोज लगानी होगी 93 लाख वैक्सीन: वित्त मंत्रालय 

वित्त मंत्रालय ने मई महीने के लिए जारी अपनी मासिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से आर्थिक सुधार की रफ्तार थोड़ी मंद पड़ी है. रिपोर्ट में कहा गया है ​कि आगे किसी लहर की आशंका से बचने के लिए टीकाकरण अभियान तेज करना होगा.

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वैक्सीनेशन अभियान तेज करने की सलाह (फाइल फोटो: PTI)
वैक्सीनेशन अभियान तेज करने की सलाह (फाइल फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वित्त मंत्रालय ने जारी की मासिक रिपोर्ट
  • कोविड वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने की सलाह

केंद्रीय वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अगर कोविड के लिए सितंबर तक हर्ड इम्युनिटी लानी है और इकोनॉमी को पटरी पर लाना है तो हर दिन करीब 93 लाख वैक्सीन लगानी होगी. 

वित्त मंत्रालय ने मई महीने के लिए जारी अपनी मासिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 की दूसरी लहर की वजह से आर्थिक सुधार की रफ्तार थोड़ी 'मंद' पड़ी है. रिपोर्ट में कहा गया है, 'पहली लहर के विपरीत दूसरी लहर का असर सभी राज्यों में एक जैसा नहीं है. हालां​कि यह काफी व्यापक है और इस बार ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच चुका है.' 

टीकाकरण अभियान तेज करना होगा

रिपोर्ट में कहा गया है ​कि आगे किसी लहर की आशंका से बचने के लिए टीकाकरण अभियान तेज करना होगा. वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है, 'हर्ड इम्युनिटी 75 से 80 फीसदी जनसंख्या हासिल करने के लिए टीकाकरण करने से उपभोक्ताओं और उत्पादकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और आर्थिक तरक्की के इंजन को फिर से गति देगा. अगर सितंबर तक हर्ड इम्युनिटी हासिल करनी है, हर दिन 93 लाख वैक्सीन लगाने की जरूरत होगी.' 

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मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर की रफ्तार धीमी पड़ने, टीकाकरण अभियान के तेजी से सुधार और केंद्रीय बजट में नियोजित राजकोषीय उपायों से आने वाली तिमाहियों में निवेश प्रक्रिया बढ़ेगी.

रिपोर्ट में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रभाव के बारे में कहा गया है कि इसका मौजूदा तिमाही में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र पर प्रभाव हल्का रह सकता है. रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया कि आर्थिक सुधार की गति को फिर से हासिल करने के लिए टीकाकरण की गति और अभियान को तेज करना महत्वपूर्ण है.

अर्थव्यवस्था में ‘V आकार’

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में वित्त 2020-21 की दूसरी छमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में ‘वी आकार’ यानी तेजी से सुधार देखने को मिला. पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था के 0.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 1.6 फीसदी की अनुमानित बढ़ोतरी से सालाना जीडीपी में पहले के 8 फीसदी गिरावट आने के मुकाबले दूसरी अग्रिम अनुमान में यह सुधरकर 7.3 फीसदी गिरावट रह गई.

 

 

 

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