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यूक्रेन संकट के चलते टल जाएगा LIC IPO? चेयरमैन ने दिया ये अपडेट

LIC IPO Date: भारत में लोग बेसब्री से LIC IPO का वेट कर रहे हैं. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा. कंपनी अगले महीने IPO लाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है.

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फाइल फोटो फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विनिवेश लक्ष्य के लिहाज से अहम है यह आईपीओ
  • सरकार पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी

यूक्रेन को लेकर रूस और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से जारी तनातनी के कारण पिछले कुछ हफ्तों से स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव (Volatility in Stock Markets) देखने को मिल रहा है. दूसरी ओर, भारत की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) की आईपीओ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.इसी बीच सोमवार को LIC के चेयरमैन एम आर कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. सभी लोग इस बात की उम्मीद कर रहे थे कि कुमार LIC के IPO की डेट (LIC IPO Date) घोषित करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालांकि, कुमार ने इस दौरान आईपीओ को लेकर कुछ अहम अपडेट दिए. 

जियो-पॉलिटिकल स्थिति पर है नजर

LIC के चेयरमैन कुमार ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी पूरी जियो-पॉलिटिकल परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और मार्च में लिस्टिंग को लेकर इच्छुक है. कुमार से जब संवाददाताओं ने यह सवाल पूछा कि उभरती जियो-पॉलिटिकल परिस्थितियों का आईपीओ पर किस तरह का असर होगा, तो उन्होंने कहा, "हम लोग परिस्थितियों पर करीबी और सतर्क तरीके से नजर बनाए हुए हैं...हम मार्च में लिस्टिंग चाहते हैं." LIC अपने आईपीओ के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर जमा कर चुकी है. 

भारत का सबसे बड़ा IPO

यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा. इस इनिशियल पब्लिक ऑफर के तहत सरकार LIC की 5 फीसद हिस्सेदारी बेचकर करीब 63,000 करोड़ रुपये जुटाएगी. लिस्टिंग के बाद LIC का मार्केट कैप (LIC M-Cap) वास्तव में रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries M-Cap) और टीसीएस (TCS M-Cap) जैसी बड़ी कंपनियों के टक्कर का होगा.

यूक्रेन संकट का विदेशी निवेश पर पड़ा है असर
यूक्रेन को लेकर रूस और NATO के बीच टेंशन का असर फॉरेन कैपिटल के फ्लो पर देखने को पड़ा है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) ने जियो-पॉलिटिकल टेंशन और यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावनाओं के बीच फरवरी में अब तक भारतीय मार्केट से 18,856 करोड़ रुपये की निकासी की है. डिपॉजिटरी के डेटा के मुताबिक 1-18 फरवरी के बीच निवेशकों ने इक्विटी मार्केट से 15,342 करोड़ रुपये निकाले जबकि बॉन्ड मार्केट से 3,629 करोड़ रुपये की निकासी की.इस दौरान उन्होंने हाइब्रिड इंस्ट्रुमेंट्स में 115 करोड़ रुपये का निवेश किया. इस तरह देखा जाए तो इस अवधि में विदेश निवेशकों ने नेट आधार पर 18,856 करोड़ रुपये की निकासी की. यह लगातार पांचवां महीना है जब विदेशी निवेशकों ने नेट बेसिस पर मार्केट से पैसे की निकासी की. 

LIC का IPO मार्च तक आने की उम्मीद है. यह आईपीओ सरकार के संशोधित विनिवेश लक्ष्य (Disinvestment Target) को हासिल करने के लिहाज से काफी अहम है.

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