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पेट्रोल-डीजल अभी बना रहेगा महंगा, टैक्स घटाने की इच्छुक नहीं दिख रही सरकार!

देश में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार ऊंचाई पर बने हुए हैं. अधिकतर शहरों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि सरकार इस पर लगने वाले उत्पाद शुल्क इत्यादि में कटौती कर सकती है, लेकिन इसके आसार नजर नहीं आ रहे...

महंगा बना रहेगा पेट्रोल (File Photo) महंगा बना रहेगा पेट्रोल (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ‘3 महीने में पेट्रोल-डीजल से कमाए 94,181 करोड़’
  • ‘पेट्रोल पर 10 रुपये घटाने से भी नहीं घटेगी महंंगाई’
  • ‘राज्यसभा में बताई सरकार ने ऊंचे टैक्स की वजह’

देश की आम जनता को महंगे पेट्रोल और डीजल की मार अभी और झेलनी होगी. इनकी कीमत के लगातार ऊंचाई पर बने रहने के बीच उम्मीद की जा रही थी कि केन्द्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में कुछ कमी कर आम लोगों को राहत दे सकती है. लेकिन फिलहाल इसके संकेत कम ही दिख रहे हैं.

टैक्स घटाने से कम नहीं होगी महंगाई
CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की भी कमी करती भी है. तो भी इससे महंगाई सिर्फ 0.2% ही कम होगी. जबकि सरकार के राजकोषीय घाटे पर 0.58% का असर पड़ेगा. चैनल ने सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि सरकार की पेट्रोल और डीजल पर टैक्स घटाने की कोई इच्छा नहीं है.

राज्यसभा में ये बोली सरकार
राज्यसभा में मंगलवार को सरकार की ओर से एक लिखित जवाब में कहा गया कि मौजूदा समय में राजकोष की गिरती स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगाई है. ताकि देश में बुनियादी ढांचे और अन्य विकास कार्यों के खर्च के लिए संसाधन जुटाए जा सकें.

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास कार्यों पर होने वाले खर्च के लिए सरकार संसाधन जुटाने के लक्षित प्रयास कर रही है. राजकोष की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी की दरों को तर्कसंगत रखा है. जबकि इन पर वैट की वसूली राज्य सरकारें करती हैं.

उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और रुपये एवं डॉलर की विनिमय दर के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटाती-बढ़ाती रहती हैं.

3 महीने में पेट्रोल-डीजल से कमाई
चालू वित्त वर्ष की पहली अप्रैल-जून तिमाही में केन्द्र सरकार ने उत्पाद शुल्क के तौर पर पेट्रोल और डीजल से 94,181 करोड़ रुपये जुटाए हैं. देश में कोरोना की दूसरी लहर की वजह से सरकार का खर्च बिगड़ा है और इस वजह से राजकोष की हालत भी ठीक नहीं है.

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