अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की चिंता से पहले ही ग्लोबल टेंशन हाई पर है. क्रूड ऑयल की कीमतों ने शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है. हालांकि, US-Iran Ceasefire और दोनों देशों में दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर उम्मीदों के चलते बाजारों में रिकवरी जरूर देखने को मिली है, लेकिन अब इंग्लैंड से शेयर मार्केट्स को लेकर बड़ी चेतावनी सामने आई है.
बैंक ऑफ इंग्लैंड की डिप्टी-गवर्नर सारा ब्रीडेन ने दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट की आशंका जताई है. ये चेतावनी ऐसे समय में आई है, जबकि लंबे समय तक गिरावट झेलने के बाद मुश्किल से शेयर बाजारों में रौनक लौटी है. सारा ने इसके पीछे के बड़े कारणों के बारे में भी बताया है.
US से जापान तक शेयर बाजारों में तेजी
वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी का सिलसिला जारी है. भारत में बीते शुक्रवार को भले ही बीएसई का सेंसेक्स 999 अंक और एनएसई का निफ्टी 275 अंक की बड़ी गिरावट लेकर बंद हुआ, लेकिन पूरे अप्रैल महीने में दोनों इंडेक्स में करीब 7% की तेजी दर्ज की गई है. न सिर्फ भारत, बल्कि अमेरिका और एशिया के शेयर मार्केट भी बमबम नजर आए हैं. वॉल स्ट्रीट पर S&P-500 इंडेक्स ने 7,168.59 का रिकॉर्ड हाई छू लिया है, NASDAQ ने भी 24,854.04 का हाई लेवल छुआ. हालांकि, अंत में ये मामूली गिरावट के साथ 24,836.60 पर क्लोज हुआ.
एशियाई बाजारों पर नजर डालें, तो जापान का निक्केई-225 (Japan Nikkei) पहली बार 60,000 का आंकड़ा पार कर गया है. साउथ कोरिया का कोस्पी (KOSPI) बीते 23 अप्रैल को 6,557.76 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था. इसके अलावा ब्रिटेन में FTSE-100 इंडेक्स 10,379.08 पर पहुंचा और एक साल में ये 23% से ज्यादा बढ़त हासिल कर चुका है.
ग्लोबल मार्केट बिखरने वाला है?
अमेरिका से जापान, ब्रिटेन तक शेयर बाजारों में इन तेजी के आंकड़ों के बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank Of England) की सारा ब्रीडेन का मानना है कि यह आशावाद जल्द खत्म हो सकता है. साइमन जैक की बीबीसी रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक की डिप्टी-गवर्नर ब्रीडेन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा शेयर कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डालने वाले जोखिमों को नजरअंदाज कर रही हैं और उन्हें वैश्विक बाजार में गिरावट की आशंका है. उन्होंने मौजूदा वैल्यूएशन और जोखिमों के बीच अंतर पर फोकस किया है.
सारा ने कहा कि, 'शेयर बाजार में काफी जोखिम है, फिर भी संपत्ति की कीमतें लाइफ टाइम हाई पर पहुंच रही हैं. हमें उम्मीद है कि किसी न किसी बिंदु पर इसमें बदलाव आएगा.' इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि, 'जो बात मुझे रात में सोने नहीं देती, वह यह संभावना है कि कई जोखिम एक साथ सामने आ सकते हैं, एक बड़ा व्यापक आर्थिक झटका लग सकता है, प्राइवेट लोन में विश्वास कम हो सकता है, AI और अन्य जोखिम भरे मूल्यांकन में बदलाव आ सकता है, ऐसे माहौल में क्या होगा और क्या हम इसके लिए तैयार हैं?'
सबसे बड़ी ये चिंता सता रही
ब्रीडेन 'शैडो बैंकिंग' सिस्टम की तेल वृद्धि को लेकर सबसे ज्याादा चिंतित नजर आई हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्राइवेट लोन पिछले 15 से 20 सालों में जीरो से बढ़कर 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. हम बैंकिंग-बेस्ड ऋण संकट के बजाय निजी ऋण संकट को लेकर ही चिंतित हैं. उन्होंने आगे कहा कि उनका काम बाजार में गिरावट का समय निर्धारित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय प्रणाली इस झटके को झेल सके.
'हम इस बात पर नजर रख रहे हैं कि कीमतें कितनी गिर सकती हैं? क्या इनमें अचानक भारी गिरावट आएगी? और अगर ऐसा होता है, तो अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा? मैं यह नहीं कह रही कि यह आज होगा, कल होगा या 12 महीने बाद होगा. हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर ऐसा होता है तो सिस्टम मज़बूत हो.'
बैंक ऑफ इंग्लैंड की सारा ब्रीडेन ने एआई में लगातार बढ़ रहे निवेश पर भी बात की. उन्होंने कहा कि प्रोद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में करोड़ों डॉलर का निवेश कर रही हैं. BBC की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ लोगों ने इसकी तुलना 1990 के दशक के 'डॉट कॉम बबल' से की है, जब निवेशकों ने अन-ऑथेंटिक स्टार्टअप्स में पैसा लगाया था जो जल्दी ही दिवालिया हो गए या उनके मूल्य से अरबों डॉलर कम हो गए.