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इकोनॉमी पर मंदी का ग्रहण! ये आंकड़े बढ़ा रहे सरकार की टेंशन

लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को तकनीकी तौर पर मंदी माना जाता है. कहने का मतलब ये है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर मंदी को स्वीकार कर लिया है.

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मंदी की चपेट में इकोनॉमी
मंदी की चपेट में इकोनॉमी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ -7.5 फीसदी रही
  • राजकोषीय घाटा 9.53 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया
  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.518 अरब डॉलर बढ़ गया

सितंबर तिमाही में जीडीपी के आंकड़े बता रहे हैं कि भारतीय इकोनॉमी आधिकारिक तौर पर मंदी की चपेट में आ चुकी है. हालांकि, जून की तिमाही के मुकाबले रिकवरी देखने को जरूर मिली है लेकिन इसके बावजूद सरकार के लिए चुनौती बरकरार है. 

क्या हैं जीडीपी के ताजा आंकड़े

ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी यानी सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में 7.5 फीसदी रही है. वित्त वर्ष की पहली यानी जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 24 फीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है. लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को तकनीकी तौर पर मंदी माना जाता है. कहने का मतलब ये है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर मंदी को स्वीकार कर लिया है.

आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2020-21 की सितंबर तिमाही में भारतीय इकोनॉमी अनलॉक के चरण से गुजर रही थी. मतलब ये कि सख्त लॉकडाउन के बाद इकोनॉमी को धीरे-धीरे खोला जा रहा था. 

चीन पॉजिटिव, यूके-यूएस निगेटिव
भारत के अलावा ब्रिटेन, जापान, अमेरिका, इटली, फ्रांस, जर्मनी की इकोनॉमी भी दूसरी तिमाही में निगेटिव जोन में है. लेकिन ब्रिटेन के बाद भारत की जीडीपी अब भी सबसे बुरे दौर में है. हालांकि, चीन की इकोनॉमी दूसरी तिमाही में 4.9 प्रतिशत रही. वहीं अप्रैल-जून तिमाही में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. 

कोर सेक्टर का क्या है हाल

इसी तरह, कोर सेक्टर के आंकड़े बता रहे हैं कि अब भी हालात ठीक नहीं हैं. कोयला, कच्‍चा तेल, उर्वरक, स्‍टील, पेट्रो रिफाइनिंग, बिजली और नेचुरल गैस उद्योगों को किसी अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद माना जाता है. यही आठ क्षेत्र कारोबार की भाषा में कोर सेक्‍टर कहे जाते हैं. ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि कोर सेक्टर का उत्पादन इस बार अक्टूबर महीने में एक साल पहले की तुलना में 2.5 प्रतिशत घट गया. यह लगातार आठवां महीना है, जब इन क्षेत्रों का उत्पादन कम हुआ हो. 

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कहां ग्रोथ, कहां गिरावट

कहां ग्रोथ 
कोल: 11.6%
सीमेंट: 2.8% 
इलेक्ट्रिसिटी: 10.5%
फर्टिलाइजर्स: 6.3%

कहां गिरावट
क्रूड आयल: - 6.2%
नेचुरल गैस: - 8.6%
रिफाइनरी प्रोडक्ट्स: - 17.0%
स्टील: - 2.7% 

राजकोषीय घाटा भी बढ़ा

चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर के अंत तक केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 9.53 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया जो सालाना बजट अनुमान का करीब 120 प्रतिशत है. इकोनॉमी के लिए ये सही संकेत नहीं हैं. मुख्य रूप से राजस्व संग्रह कम रहने से घाटा बढ़ा है. आपको बता दें कि चालू वित्त वर्ष के बजट में 2020-21 के लिये राजकोषीय घाटा 7.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है.

बेरोजगारी दर के आंकड़े
हाल के आंकड़ों के मुताबिक देश की बेरोजगारी दर 22 नवंबर को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 7.8 फीसदी पर पहुंच गई है. वहीं 25 अक्टूबर के बाद लगातार चौथे हफ्ते ऐप्लॉयमेंट रेट में गिरावट दर्ज की गई है. आपको बता दें कि अक्टूबर में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 6.98 फीसदी थी जबकि सितंबर में यह आंकड़ा 6.67 फीसदी था.

विदेशी मुद्रा भंडार पर अच्छी खबर
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 20 नवंबर को समाप्त सप्ताह में 2.518 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 575.29 अरब डालर के नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. भारतीय रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह बताया गया. इससे पिछले 13 नवंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.277 अरब डॉलर की भारी वृद्धि के साथ 572.771 अरब डॉलर हो गया था. 

 

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