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BPCL का निजीकरण: प्रारंभिक बोलियां आज बंद होगी, रिलायंस है तगड़ी दावेदार

ऐसे संकेत हैं कि ब्रिटेन की बीपी, फ्रांस की टोटल और सऊदी अरामको जैसी दिग्गज कंपनियां इसके लिए दौड़ से बाहर ही रहेंगी. इसलिए अब सबकी निगाहें देस की नंबर वन कंपनी रिलायंस पर हैं. सरकार BPCL में अपनी पूरी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है. 

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BPCL का हो रहा निजीकरण
BPCL का हो रहा निजीकरण
स्टोरी हाइलाइट्स
  • BPCL के निजीकरण की प्रक्रिया चल रही है
  • सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है
  • रिलायंस है इसे खरीदने की तगड़ी दावेदार

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के निजीकरण के लिए प्रारंभिक बोलियां सोमवार को बंद हो जाएंगी. ऐसे संकेत हैं कि ब्रिटेन की बीपी, फ्रांस की टोटल और सऊदी अरामको जैसी दिग्गज कंपनियां इसके लिए दौड़ से बाहर ही रहेंगी. इसलिए अब सबकी निगाहें देस की नंबर वन कंपनी रिलायंस पर हैं. सरकार भारत में दूसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और विपणन कंपनी BPCL में अपनी पूरी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है. 

समय-सीमा अब नहीं बढ़ेगी! 

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) सचिव तुहिन कांत पाण्डेय ने पिछले महीने कहा था कि समयसीमा को अब और नहीं बढ़ाया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक बीपी, टोटल, रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनी रोजनेफ्ट और सऊदी अरामको जैसी विदेशी दिग्गज कंपनियां कीमत को देखते हुए बोली लगाने की बहुत इच्छुक नहीं हैं. 

सरकार भारत की दूसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और विपणन कंपनी BPCL में अपनी पूरी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है और वह चार मौकों पर शुरुआती अभिरुचि पत्र (ईओआई) दाखिल करने की तारीफ को आगे बढ़ा चुकी है. मौजूदा समयसीमा 16 नवंबर है.  

इसे देखें: आजतक LIVE TV 

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के मुताबिक बताया है कि बीपी और टोटल के बोली लगाने की संभावना नहीं है और ऐसी खबरें भी हैं कि रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनी रोजनेफ्ट या उसकी सहयोगी और सउदी अरब की तेल कंपनी (सउदी अरामको) कीमत को देखते हुए बोली लगाने की बहुत इच्छुक नहीं हैं. सूत्रों ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया परंपरागत ईंधन से हट रही है, 10 अरब अमेरिकी डॉलर के करीब की कीमत काफी अधिक है. 

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महंगा है सौदा! 

इसके अलावा कोविड-19 महामारी ने पारंपरिक ईंधनों की मांग को घटाया है और हाइड्रोजन तथा बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल उम्मीद से अधिक तेजी से बढ़ सकता है. बीएसई पर शुक्रवार को 412.70 रुपये के बंद भाव पर BPCL में सरकार की 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी 47,430 करोड़ रुपये की होती है.

साथ ही अधिग्रहणकर्ता कंपनी को जनता से 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए ओपन ऑफर लाना होगा, जिसकी लागत 23,276 करोड़ रुपये होगी. सूत्रों ने कहा कि BPCL सालाना लगभग 8,000 करोड़ रुपये का लाभ कमाती है और इस गति से निवेशक को बोली की 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूलने में 8-9 साल लग जाएंगे. 

रिलायंस है तगड़ी दावेदार 

सूत्रों के मुताबिक रिलायंस इस बोली के लिए सबसे तगड़ी दावेदार है. रिलायंस के लिए यह फैसला तार्किक लगता है क्योंकि रिलायंस अपनी जामनगर रिफाइनरी को BPCL की मुंबई, कोच्चि और बीना इकाइयों के साथ संयोजित कर सकती है और अपने 1406 से अधिक ईंधन स्टेशनों का BPCL के 17,138 पेट्रोल पंपों के साथ विलय कर सकती है. 

रिलायंस ने अभी तक BPCL को लेकर अपने इरादों पर चुप्पी बनाए रखी है. रिलायंस ने हाल में BPCL के पूर्व अध्यक्ष सार्थक बेहुरिया को कंपनी में बड़े पद पर नियुक्त किया था और कुछ हफ्ते पहले इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के पूर्व चेयरमैन संजीव सिंह को भी नियुक्त किया.

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