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India Today AI Summit: 'एआई से जॉब जाने का खतरा नहीं, अगर...', एक्सपर्ट ने समझाया तरीका

India Today AI Summit 2026: एआई को लेकर फैले नौकरियां खत्म होने के डर को लेकर इंडिया टुडे एआई समिट में शामिल हुए एक्सपर्ट्स ने तस्वीर साफ की और बताया कि कैसे इससे नुकसान होने के बजाय 100% फायदा हो सकता है.

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एआई से नौकरियों पर खतरे को लेकर एक्सपर्ट ने की बात. (Photo: ITG/Screengrab)
एआई से नौकरियों पर खतरे को लेकर एक्सपर्ट ने की बात. (Photo: ITG/Screengrab)

इंडिया टुडे एआई समिट 2026 में AI के असर और नौकरियों पर खतरे को लेकर एक्सपर्ट्स ने तस्वीर साफ की. 'Is AI Displacing More Jobs Than Creating?' सेशन में शामिल हुए डेलॉइट इंडिया के ग्लोबल एआई लीडर, Yotta CEO सुनील गुप्ता, Zetwork CEO अमृत आचार्य और कैशफ्री पेमेंट्स के को-फाउंडर रीजू दत्ता ने एआई की एंट्री से जॉब जाने के खतरे को लेकर उठ रहे सवालों के जबाव में कहा कि इससे खतरा नहीं है, बल्कि 100% फायदा दिखता नजर आ रहा है. उन्होंने रिस्किलिंग की जरूरत पर जोर देते हुए एआई के फायदों को उदाहरण देते हुए समझाया...

क्या AI के आने से नौकरी जाएगी? 
सुनील गुप्ता ने कहा कि इसका कोई जबाव नहीं है, सबकुछ खत्म नहीं हो रहा है, हालांकि, इसका कुछ असर देखने को मिल रहा है. शायद कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर कोडिंग जैसे सेक्टर में मैनपावर कम होगी. बहुत ज्यादा टास्क ऑटोमेटिव हो जाएंगे, जिससे कुछ जॉब्स पर असर पड़ेगा. वहीं एआई फैक्ट्रीज बनाने के लिए भी लोगों की ही जरूरत होगी, यानी इसके लिए कर्मचारियों की जरूरत होगी. कई सेक्टर्स में एआई जॉब क्रिएट ही करेगा. 

उन्होंने कहा कि कंपनियों में रिस्किलिंग की जरूरत है, इसके जॉब लॉस होता नहीं दिख रहा है. दरअसल, हर कोई एआई का एक्सपर्ट बन जाए ये जरूरी नहीं, बल्कि हर एक व्यक्ति को ये जानना जरूरी है कि एआई का इस्तेमाल कैसे किया जाए और इसके जरिए प्रोडक्टिविटी बढ़ाई जाए.  लोगों को सोचना होगा कि कंपनी में ये काम एआई कर लेगा, तो मैं कुछ अलग काम करूं, जिससे कंपनी का प्रॉफिट हो सके. एआई के आने से प्रोडक्टिवीटी बढ़ेगी, रेवेन्यू क्रिएट करने में मददगार होगी. आपको रेगुलर कामों से ऊपर उठकर हायर लेवल वर्क करने होंगे, तो कोई असर नहीं दिखेगा. कई चीजें ऐसी हैं, जो मशीन नहीं कर सकती है. मतलब ह्यूमन एलिमेंट हमेशा बना रहने वाला है. 

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100% फायदा पहुंचाएगा AI
AI से जॉब रिस्क के सवाल पर Cashfree Payments के को-फाउंडर रीजू दत्ता ने कहा कि एआई के नुकसान के बजाय, इसका 100 फीसदी फायदा ही होने वाला है. जो लोग ये सोचते हैं कि इस नई तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं, उन लोगों के लिए ये बड़ी ऑपर्च्यूनिटी बन सकती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में हर कोई मोबाइल इंटरनेट और Chatgpt जैसे एआई टूल्स का यूज करने के मामले में भारत दूसरा बड़ा देश बन चुका है.  

कैसे होगा एआई का असर कम? 
Zetwork CEO अमृत आचार्य ने कहा कि इसका कुल मिलाकर इम्पैक्ट पॉजिटिव ही रहेगा. इकोनॉमी ग्रोथ में ये मदद करेगा, तो जॉब क्रिएशन भी बढ़ेगा. बात सिर्फ इतनी है कि अगर आपमें क्षमता है, तो ये बड़ा काम नहीं है, बल्कि इसे सीखकर, इसका यूज करके आगे बढ़ा जा सकता है. एआई से जब सवाल करेंगे, तो उसका जबाव देगा, वो ह्यूमन की तरह तमाम आईडियाज सोचने में सक्षम नहीं है. 

उन्होंने एआई के बुरे असर से बचने के बारे में बात करते हुए कहा कि अगर इच्छुक हैं, तो सीख सकते हैं. हर कोई इसका इस्तेमाल सीख सकता है. सीखते रहने की आदत डालनी होगी. इससे फैसे जॉब लॉस के डर के बारे में कहा कि ये किसी भी नई जॉब या क्रिएशन में देखने को मिलता है, कि उसका क्या असर होगा, इसे कैसे सीखा जाए, अगर नहीं सीखे तो नुकसान होगा. खासतौर पर युवाओं को ये समझना होगा कि AI ड्राइवन इकोनॉमी में इसका इस्तेमाल करते हुए कैसे सर्वाइव किया जा सकता है. 

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रिस्किलिंग पर जोर, जापान का उदाहरण 
Deloitte India के ग्लोबल एआई लीडर नितिन बंसल ने कहा कि AI Impact और इसके डर को उदाहरण देते हुए समझाया. उन्होंने कहा कि एआई के युग में रिस्किंग पर जोर दिया जाना चाहिए. हर टेक्नोलॉजी कभी भी पूरी जेनरेशन को प्रभावित नहीं करती, बल्कि करीब आधी पर इम्पैक्ट डालती है. लोग यूज करते हुए इसकी इंपोर्टेंस को समझ लेते हैं. एआई के मामले में भी क्यूरोसिटी या लर्निंग से लेकर एडॉप्टाबिलिटी अहम है, ऐसा करके रिक्सिल हो सकते हैं और फिर जॉब जाने के डर का सवाल ही नहीं उठता. 

जापान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक दशक पहले वहां स्टोर्स में रोबोट लगाए गए, जो तमाम कामों के लिए थे, लेकिन इन रोबोट्स को कंट्रोल और ऑपरेट कैसे किया गया. इसके लिए भी एक ह्युमन ऑपरेटर की जरूरत पड़ी. रोबोट्स को ट्रेंड करने में ह्युमन पावर की अहमियत रही है और इसे लेकर जॉब क्रिएट करने की जरूरत भी महसूस होती रही है. 

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