संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) ने इकोनॉमी को लेकर बड़ा दावा किया है. आर्थिक सर्वेक्षण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की विकास गति बरकरार है, और जीडीपी ग्रोथ 7.5 फीसदी तक भी संभव है. क्योंकि देश में निर्माण, भूमि सुधार और लगातार सरकारी निवेश पर फोकस किया जा रहा है.
CEA ने कहा कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारत एक बेहतर आर्थिक प्रदर्शन करने वाला प्लेयर बनकर उभरा है. भारत अपनी ग्रोथ को बरकरार रखकर बड़ा इशारा कर दिया है. उन्होंने कहा कि इस माहौल में 'स्वदेशी' नीति भारत के लिए जरूरी हो गई है. वजह यह है कि अब वैश्विक व्यापार पहले जैसा नहीं रहा. पहले देशों के बीच व्यापार निष्पक्ष और नियमों पर आधारित होता था. लेकिन अब राजनीति, युद्ध, टैरिफ और प्रतिबंध इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
आज की वैश्विक स्थिति क्या है?
आर्थिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक दुनिया में सप्लाई-चेन बार-बार टूट रही है. कई देश अपने फायदे के लिए व्यापार नियम बदल रहे हैं. जरूरी सामान और तकनीक पर रोक लगाई जा रही है. ऐसे में अगर भारत पूरी तरह आयात पर निर्भर रहेगा, तो किसी भी वैश्विक संकट में देश कमजोर पड़ सकता है.
स्वदेशी का क्या मतलब?
नागेश्वरन ने कहा कि स्वदेशी का मतलब ये नहीं है कि आप विदेशी सामान खरीदना बंद कर दें. या ऊंचे टैक्स लगाकर घरेलू कंपनियों को बचाओ, बल्कि इस माहौल में स्वदेशी मतलब है कि जरूरी चीजें देश में बनाने की क्षमता विकसित करना है. कुछ गिने-चुने देशों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना है. खासकर देश को मेडिसिन, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, रक्षा जैसे अहम सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना है.
उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्व की तस्वीर बताती है कि जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ेगी, आयात भी बढ़ेगा. लेकिन चुनौती यह है कि कठिन समय में भारत जरूरी चीजों के लिए दूसरों पर मजबूर न हो. जिन देशों की करेंसी मजबूत होती है, वहां मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बेस होता है. इसलिए समय आ गया है कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट बढ़ाने होंगे, ताकि रुपया और अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत रहें.
सरकार को यह भी कहा गया है कि बिना सोचे-समझे ज्यादा टैरिफ न लगाएं. वरना घरेलू कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी, और भारत का निर्यात महंगा होकर कमजोर हो जाएगा. इसलिए स्वदेशी नीति संतुलित और समझदारी से लागू करनी होगी. नागेश्वरन ने कहा कि भारत के लगातार संरचनात्मक सुधार किए हैं. जिसकी झलक जीडीपी में देखने को मिल रही है, इसे और रफ्तार की जरूरत है.