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Budget 2016: टैक्सपेयर्स को जेटली से है इन 10 चीजों की उम्मीद

29 फरवरी को वित्त वर्ष 2016-17 का बजट पेश किया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे में आम जनता के लिए क्या खास होगा, ये तो उसी दिन पता चलेगा. फिलहाल जानते हैं टैक्स पेयर्स की इस बजट से उम्मीदों के बारे में-

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टैक्स पेयर्स की 10 उम्मीदें टैक्स पेयर्स की 10 उम्मीदें

देश का आम बजट 29 फरवरी को पेश किया जाएगा. ऐसे में हर वर्ग की निगाहें इस समय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर टिकी हैं. इसी तरह एक वर्ग है टैक्स पेयर्स का. आगामी बजट में टैक्स का बोझ कम होगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन उससे पहले जानते हैं कि इस बार के बजट से टैक्स पेयर्स क्या उम्मीद लगाए बैठे हैं. वैसे एक्सपर्ट्स भी इनमें अपनी सहमत‍ि जता रहे हैं.

1) बजट में टैक्स के नियमों को और आसान बनाने पर जोर देना चाहिए. साथ ही इनकम टैक्स पेयर्स चाहते हैं कि छूट की सीमा 2.5 से बढ़ाकर 3 लाख कर दी जाए.

2) सरकार को बेहतर बचत योजनाओं के साथ-साथ और विकल्प पर विचार करने की जरूरत है जिससे टैक्सपेयर्स बचत करने के लिए प्रोत्साहित हों.

3) बजट में सेक्शन 80सी में निवेश की सीमा बढ़ाने की जरूरत है. ऐसा करने से लोगों को बचत और निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है.

4) बजट में सेक्शन 80सी के सभी इंस्ट्रुमेंट्स के लिए ईईई नियम लागू हों. फिलहाल सिर्फ 3 चीजों- पीपीएफ, जीवन बीमा प्रीमियम और ईएलएसएस, के लिए ही ईईई नियम लागू है.

5) टीडीएस के मामले में राहत मिलने की जरूरत है. टीडीएस की दर 10 फीसदी की बजाय 5 फीसदी की जानी चाहिए. इसके कम होने से ब्याज ज्यादा मिलेगा जिससे टैक्सपेयर्स का फायदा होगा.

6) टीडीएस रिफंड हफ्तेभर के अंदर देने की शुरुआत होनी चाहिए. साथ ही टीडीएस स्टेटमेंट में सुधार का अधिकार टैक्सपेयर्स को मिलना चाहिए.

7) आईटी रिटर्न जमा होने के हफ्तेभर में ही टैक्स रिटर्न का प्रावधान होना चाहिए.

8) एलटीए के दायरे में विदेशी यात्राएं भी शामिल होनी चाहिए यानी एलटीए के फायदे के लिए सिर्फ देश में घूमने-फिरने की शर्त में बदलाव जरूर करना चाहिए. साथ ही सरकार को विदेशी यात्रा के लिए एलटीए छूट की सीमा भी तय करनी चाहिए.

9) टैक्सपेयर्स की शिकायतों का स्टेटस ऑनलाइन देख सके इसकी व्यवस्था होनी चाहिए.

10) सरकार को एनपीएस को बढ़ावा देना चाहिए और एनपीएस से पैसे निकालने पर टैक्स लगाने का नियम बदलना चाहिए. साथ ही इसे भी ईईई के दायरे में लाना चाहिए.

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