जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को कहा कि सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे व्यंग्यात्मक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) को लेकर जनता की जबरदस्त प्रतिक्रिया सरकार के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह केवल एक डिजिटल अभियान है, लेकिन इसकी लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि व्यवस्था पर भरोसा घट रहा है और लोगों में असंतोष बढ़ रहा है.
पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए किशोर ने कहा कि यह तथाकथित पार्टी कुछ ही दिनों में चर्चा में आ गई है और लगभग दो करोड़ लोग इससे जुड़ चुके हैं. हालांकि, अभी इसका कोई संगठनात्मक ढांचा, नेतृत्व या स्पष्ट उद्देश्य सामने नहीं है.
उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया समाज में व्याप्त बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई और गैस व खाद की कमी जैसी समस्याओं का नतीजा है. लोगों का इस तरह किसी व्यंग्यात्मक अभियान से जुड़ना यह दिखाता है कि वे मौजूदा व्यवस्था से निराश और चिंतित हैं.
2029 चुनाव को लेकर क्या बोले प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इसका असर 2029 के आम चुनावों पर पड़ेगा या नहीं, लेकिन सरकार को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उनके अनुसार यह संकेत है कि लोगों का भरोसा व्यवस्था से हटकर चिंता और असंतोष की ओर बढ़ रहा है.
यह डिजिटल अभियान पिछले सप्ताह सामने आया था और बेरोजगारी, शिक्षा नीति और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों पर व्यंग्यात्मक मीम्स और पोस्ट के जरिए तेजी से लोकप्रिय हुआ. बाद में इसका एक्स (ट्विटर) अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया, जिसके बाद एक नया अकाउंट ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से सामने आया.
इस बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उनके इंस्टाग्राम पेज, पर्सनल अकाउंट और एक्स हैंडल या तो हैक कर लिए गए हैं या प्रतिबंधित कर दिए गए हैं, और अब की गई किसी भी पोस्ट को आधिकारिक बयान नहीं माना जाए.