बिहार ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित बिहार सरस मेला 2025-26 का रविवार को भव्य समापन हुआ. पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 12 दिसंबर से 4 जनवरी तक चले इस 24 दिन के मेले में 18 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. जीविका दीदियों द्वारा प्रदर्शित हस्तशिल्प, हथकरघा और पारंपरिक व्यंजनों की बिक्री से कुल 28 करोड़ 52 लाख रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड कारोबार दर्ज किया गया.
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला उद्यमियों को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया. इस आयोजन ने बिहार सहित 25 राज्यों के उद्यमियों को अपनी कला और उत्पादों के प्रदर्शन के लिए एक साझा राष्ट्रीय मंच प्रदान किया.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और सतत जीविकोपार्जन योजना जैसी पहलों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सफलता हासिल की है.
सरस मेला ने तोड़े सारे पुराने रिकॉर्ड
समापन समारोह के दौरान मंत्री श्रवण कुमार ने मेले का भ्रमण कर ग्रामीण शिल्पकारों के उत्पादों की सराहना की. उन्होंने कहा कि जीविका अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त जरिया बन चुकी है. 24 दिनों के अंदर 28.52 करोड़ रुपये की खरीदारी यह दर्शाती है कि लोग ग्रामीण उत्पादों को काफी पसंद कर रहे हैं. मेले में उमड़े 18 लाख लोगों के जनसैलाब ने इस वर्ष के आयोजन को अब तक का सबसे सफल सरस मेला बना दिया है.
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जीविका दीदियों ने पेश की सफलता की मिसाल
प्रधान सचिव पंकज कुमार ने बताया कि बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की है. मेले में बिहार के सभी 38 जिलों की करीब 209 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जीविका दीदियां सूक्ष्म उद्यमी के रूप में शामिल हुईं. प्रेमलता देवी और रहनुमा जैसी महिला उद्यमियों ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कर अन्य महिलाओं को प्रेरित किया. जीविका दीदियां अब न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि समाज में नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं.
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राष्ट्रीय मंच पर बिहार की मजबूत पहचान
अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा के मुताबिक, सरस मेला अब एक राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बन चुका है. इस साल मेले में 25 राज्यों के उद्यमियों ने भाग लिया और विभिन्न सरकारी विभागों व बैंकों द्वारा 50 स्टॉल लगाए गए थे. इन स्टॉलों के जरिए लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई. हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों के इस महाकुंभ ने बिहार की सांस्कृतिक और उद्यमिता की छवि को देशभर में मजबूती के साथ पेश किया है.