शिक्षा व्यवस्था की हकीकत को उजागर करती तस्वीर मझौलिया प्रखंड के लाल सरैया पंचायत स्थित कथैया राजकीय प्राथमिक विद्यालय से सामने आई है. यहां आज भी नौनिहालों को पठन-पाठन के लिए स्कूल भवन नहीं, बल्कि बांसवाड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है.
उमस भरी गर्मी में पढ़ने को मजबूर बच्चे
विद्यालय में फिलहाल 54 बच्चे नामांकित हैं और तीन शिक्षक तैनात हैं. कक्षा 1 से लेकर 5 तक की पढ़ाई यहां होती है, लेकिन भवन के अभाव में बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र और बांसवाड़ी में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. उमस भरी गर्मी और असुविधाजनक माहौल के बीच भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं.
कई बार अधिकारियों से कहा गया
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों से विद्यालय भवन निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है. अभिभावकों का सवाल है कि आखिर कब तक उनके बच्चों को पेड़ और बांसवाड़ी के नीचे पढ़ाई करनी पड़ेगी.
यह तस्वीर केवल एक विद्यालय की नहीं, बल्कि बिहार की जमीनी शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को सामने लाती है. जहां शिक्षा का अधिकार कानून और सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद बच्चे आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.