अक्सर फिल्मों में दिखाई जाने वाली इमोशनल कहानी कभी-कभी असल जिंदगी में भी देखने को मिल जाती हैं. बिहार के आरा में एक ऐसा ही इमोशनल सीन लोगों को रियल लाइफ में देखने को मिला जिसे देखकर हर किसी की आंखें भर आईं. भगवान भोलेनाथ के मंदिर के पास खड़ी एम्बुलेंस के वेंटिलेटर पर एक बीमार मां लेटी थी. उसके सामने उसकी इकलौती बेटी की शादी रचाई गई.
इस अनोखी शादी में दूल्हा-दुल्हन के परिवार वाले और गांव के लोग तो शामिल थे ही. इसके साथ-साथ जिस अस्पताल में बीमार मां का इलाज चला था, उस अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी भी शामिल रहे. दरअसल, बीमार मां की हालत देख डॉक्टरों ने महिला को चंद घंटों या दिनों का मेहमान बता दिया था. इसके बाद मां की अंतिम इच्छा थी कि मरने से पहले वह अपनी इकलौती बेटी की शादी किसी तरह से उसके आंखों के सामने होते हुए देख ले.
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मरने से पहले बेटी की शादी होते देखने की थी इच्छा
इसके बाद परिवार वालों ने महिला की इच्छा को पूरी करते हुए बेटी की शादी के रस्म को पूरा किया. मामला कोईलवर प्रखंड के दिनेश्वरनाथ धाम मंदिर का है. वहां बड़हरा प्रखंड के कोल्हारामपुर गांव के रहने वाले अजय राय की पत्नी सुनीता देवी की दोनों किडनी खराब हो गई हैं.
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उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने महिला की तबीयत ज्यादा खराब देखकर उन्हें कुछ घंटों का मेहमान बता दिया था. इस बात की जानकारी जब बीमार महिला सुनीता देवी को हुई, तो उसने मरने से पहले अपनी बेटी की शादी आंखों के सामने रचाने की इच्छा जाहिर की.
अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी भी शादी में हुए शामिल
इसके बाद परिवार वालों ने जिस अस्पताल में महिला का इलाज चल रहा था, उस अस्पताल के डॉक्टर प्रेम कुमार से बात की. उनकी पूरी टीम को साथ लेकर एंबुलेंस से बीमार महिला को लेकर सीधे कोइलवर स्थित दिनेश्वर धाम मंदिर पहुंच गए. जहां पहले से ही दूल्हा-दुल्हन शादी के जोड़े में तैयार थे.
एंबुलेंस के पहुंचने के बाद मां के सामने इकलौती बेटी प्रीति कुमारी की शादी दानापुर के मानस गांव के रहने वाले सुरेश राय के बेटे अजीत कुमार के साथ की गई. सुनीता देवी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी अप्रैल में अजीत से होने वाली थी. मगर, इसी बीच उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद डॉक्टर ने उन्हें चंद दिनों का मेहमान बता दिया था.
इसी वजह से वह मरने से पहले अपनी बेटी के हाथ पीला होते देखना चाहती थीं. आज बेटी की शादी की रस्म अदायगी करके उन्होंने अपने अधूरे काम को पूरा कर लिया है. सुनीता देवी ने कहा कि अब उन्हें मौत भी आ जाए, तो कोई गम नहीं रहेगा.