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ऑटो सेक्टर के लिए आगे की राह और कठिन, SIAM ने बताई यह वजह

उद्योग को आगे बीएस-6 मानदंडों को लागू करने पर एक बार भी बिक्री में सुस्ती आने की आशंका है. इस मानदंड से कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.

ऑटो सेक्टर के लिए फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं ऑटो सेक्टर के लिए फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं

  • बीएस-6 मानदंड लागू होने के बाद एक बार भी बिक्री में सुस्ती आने की आशंका
  • मौजूदा समय में ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा कर रहा है मंदी का सामना

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) के अध्यक्ष राजन वढेरा का कहना है कि बीएस-4 उत्सर्जन नियमों से बीएस-6 में होने वाले परिवर्तनों की वजह से भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की आगे की राह और कठिन रहने वाली है.

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के ऑटो रिटेल कॉनक्लेव 2019 में उन्होंने कहा कि भले ही उद्योग बिक्री की मंदी का सामना कर रहा है, लेकिन ओईएम अपने प्रस्ताव को उन्नत करने के लिए 1000 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है.

बीएस-6 की राह आसान नहीं

उद्योग को आगे बीएस-6 मानदंडों को लागू करने पर एक बार भी बिक्री में सुस्ती आने की आशंका है. इस मानदंड से कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. मौजूदा समय में यह सेक्टर सबसे ज्यादा मंदी का सामना कर रहा है. इसके कई कारण हैं, जिसमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व तरलता की कमी शामिल है.

दरअसल ऑटोमोबाइल सेक्टर पिछले कुछ महीनों से लगातार भारी संकट से जूझ रहा है. जुलाई से सभी वाहन निर्माता कंपनियां एक साथ घाटे की नाव में सवार हैं और नाव डूब रही है. सबकी मासिक बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है.

जीएसटी में कटौती की मांग

गौरतलब है कि संकट से जूझ रहे ऑटोमोबाइल सेक्टर ने मोदी सरकार से GST रेट में फिर कटौती की मांग की है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बयान जारी का ये मांग रखी.

संभल नहीं रहा है ऑटो सेक्टर

बता दें, इस साल अगस्त में पिछले साल के मुकाबले पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री करीब 30 फीसदी घट गई है. पिछले महीने वित्त मंत्री ने जो राहत का ऐलान किया उसका असर होता नहीं दिख रहा है. 90 फीसदी फैक्ट्रीज में सिर्फ 50 प्रतिशत प्रोडक्शन हो पा रहा है.

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