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ऑटो

मोदी-ट्रंप राज में 3 अमेरिकी ऑटो कंपनियों ने भारत से समेटा कारोबार!

Harley Davidson to quit India
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भारत में Harley-Davidson के दीवानों के लिए एक बुरी खबर है. अमेरिकी कंपनी हार्ले-डेविडसन ने भारत में अपना प्रोडक्शन और सेल्स ऑपरेशन बंद करने की घोषणा की है. दरअसल, बिक्री घटने और मुनाफा कम होने से कंपनी ने भारत में कारोबार बंद करने का फैसला लिया है.  

भारत में मैन्युफैक्चरिंग बंद
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अमेरिका की दिग्गज बाइक निर्माता कंपनी हार्ले डेविडसन ने अपने खर्चों में 75 मिलियन डॉलर की कटौती की योजना बनाई है, जिसमें वह भारत में मैन्युफैक्चरिंग बंद कर रही है. कंपनी अपने कारोबार को पुनर्गठित करने जा रही है. हरियाणा के बावल में हार्ले डेविडसन का असेंबली प्लांट है, जिसे अगस्त 2009 में शुरू किया गया था. 

घटती बिक्री एक वजह
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हार्ले डेविडसन ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बाहर निकलने के साथ वह भारत में अपनी ब्रिकी और विनिर्माण कार्यों को बंद कर रही है. दो महीने पहले ही हार्ले डेविडसन ने संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे अधिक लाभदायक मुख्य बाजारों में वापस ध्यान केंद्रित करने की रणनीति का खुलासा किया था.
 

Harley-Davidson sale
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पिछले कुछ सालों में लगातार भारत में Harley-Davidson बाइक की डिमांड घटी है. अगर वित्तीय वर्ष 2019 की बात करें तो भारत में Harley-Davidson बाइक्स की बिक्री का आंकड़ा 2500 यूनिट्स से भी काफी कम रहा. 

कोरोना का कारोबार पर असर
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दरअसल, इस साल कोरोना महामारी और ऑटो सेक्टर में जारी मंदी के बीच अप्रैल से जून के बीच कंपनी केवल 100 बाइक ही बेच पाई. भारतीय बाजार में 10 साल पहले कदम रखने वाली हार्ले डेविडस निवेश के बावजूद अपनी पकड़ बनाने में नाकाम रहीं.

अब इम्पोर्ट करनी पड़ेगी बाइक
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भारत में Harley-Davidson का असेंबली प्लांट बंद होने से भारत में मौजूद बाइक की डीलरशिप्स को अब बाइक थाईलैंड से इम्पोर्ट करनी पड़ेगी. थाईलैंड से मंगाने पर कीमतों में भारी उछाल देखने को मिलेगा. क्योंकि आयात करने पर इम्पोर्ट ड्यूटी भी भरनी पड़ेगी, जिससे कीमतें बढ़ जाएंगी.

तीन साल में तीन कंपनियों ने कहा अलविदा
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डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से हार्ले-डेविडसन भारत में परिचालन बंद करने वाली अमेरिका की तीसरी वाहन निर्माता कंपनी है. इससे पहले जनरल मोटर्स ने अपने घरेलू परिचालन को समेट कर 2017 में अपने गुजरात प्लांट को बेच दिया था. इसके अलावा पिछले साल फोर्ड ने अपने कारोबार को समटते हुए अपनी अधिकांश संपत्तियां महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ जॉइंट वेंचर को ट्रांसफर कर दी थी.