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Explainer : ई-बाइक या ई-स्कूटर में से क्या चुनें? समझें दोनों के बीच का अंतर

हम में से कई लोग ई-बाइक को इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल समझ लेते हैं. लेकिन क्या वाकई इनमें कोई समानता है. आइए जानते हैं कि आखिर ई-बाइक होती क्या है, अगर इन्हें खरीदने का प्लान है तो ई-बाइक और ई-स्कूटर में से किसका चुनाव करें...

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समझें ई-बाइक और ई-स्कूटर का अंतर समझें ई-बाइक और ई-स्कूटर का अंतर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ई-बाइक से कम होगी कोरियर बिजनेस वालों की लागत
  • कॉलेज, फैक्टरी, सोसायटियों में काम की चीज ई-बाइक

लोगों का रूझान धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारों की ओर बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 2-व्हीलर सेगमेंट में तो अब हर हफ्ते 5000 गाड़ियों की बिक्री हो रही. लेकिन इस बीच अक्सर एक शब्द सामने आता है ‘ई-बाइक’, हम में से कई लोग इसे इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल समझ लेते हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर ई-बाइक होती क्या है, अगर इन्हें खरीदने का प्लान है तो ई-बाइक और ई-स्कूटर में से किसका चुनाव करें...

पहले समझें ई-बाइक को
सबसे पहले आपको ई-बाइक के कॉन्सेप्ट को समझना जरूरी है. ई-बाइक को आप हमारी पारंपरिक साइकिलों का ही नया स्वरूप मान सकते हैं. इसमें आम साइकिल की तरह पैडल भी होते हैं. वहीं इसमें बैटरी पॉवर का भी इस्तेमाल होता है इसलिए ये इलेक्ट्रिक तरीके से भी भागती है. देश में अभी जितनी ई-बाइक मौजूद हैं उनमें अधिकतर की मैक्सिमम स्पीड 20 से 25 किमी और सिंगल चार्ज में जाने की क्षमता भी 30 से 35 किमी है. कुछ ही कंपनी हैं जिन्होंने 80 से 100 किमी की रेंज वाली ई-बाइक लॉन्च की हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी कम रेंज की इस ई-बाइक का आखिर इस्तेमाल क्या है?

ई-बाइक का इस्तेमाल
अगर आप ई-बाइक के इस्तेमाल की बात करें तो इसके दो पहलू हैं. पहला ये कि इसमें आपको साइकिल चलाने का मजा भी आता है और दूसरा आपको थकान भी नहीं होती. वहीं आम साइकिल की तुलना में आप इससे 10 से 15 किलोमीटर की दूरी बड़े आराम से तय कर सकते हैं. इसके अलावा अधिकतर ई-बाइक में रिमूवेबल बैटरी होती है जिसे आप कुछ ही घंटों में पूरा चार्ज कर सकते हैं और कुछ ई-बाइक में पैडल मारने से बैटरी चार्ज होने की सुविधा भी होती है. वहीं ये ई-मोटरसाइकिल और ई-स्कूटर की तुलना में काफी सस्ती होती है जो इसे कॉस्ट इफेक्टिव बनाती है. आखिर ये ई-बाइक है किसके काम की...?

कॉलेज, फैक्टरी, सोसायटियों में काम की चीज
देश में बड़े स्टील प्लांट्स हों, सीमेंट प्लांट्स हों, पॉवर प्लांट्स हों या रिफाइनरी, इन सभी के कैंपस बड़े होते हैं. वहीं इनमें काम करने वाले लोगों के रेजिडेंशियल अपार्टमेंट्स भी कैंपस के अंदर ही होते हैं. इसी तरह आईआईटी, आईआईएम और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले बच्चों को भी कैंपस में इधर से उधर भागना पड़ता है, और नोएडा, गाजियाबाद एवं गुरुग्राम जैसे शहरों में कई हजार मकानों वाली बड़ी रेजिडेंशियल सोसायटियां होती हैं. ये सभी जगह मुख्य शहर से दूर होती हैं, ऐसे में इन जगहों पर घर या हॉस्टल से काम की जगह तक के मूवमेंट के लिए ई-बाइक बड़े काम की चीज हो सकती है. क्योंकि इस तरह के क्लोज्ड प्रीमाइसिस में ट्रै्फिक की समस्या नहीं होती, तो यहां ई-बाइक से मूवमेंट आसान और किफायती होता है.

कोरियर बिजनेस वालों की लागत कम करे
अगर आप  कोरियर या होम डिलीवरी से जुड़ा कोई बिजनेस करते हैं, तो ई-बाइक आपकी डिलीवरी लागत को काफी कम कर देती है. ई-बाइक बनाने वाली कंपनी Go Zero के सीईओ अंकित कुमार का कहना है कि कोरोना और लॉकडाउन की वजह से अब अधिकतर लोग ऑनलाइन ऑर्डर और होम डिलीवरी पर निर्भर हो गए हैं. ऐसे में पेट्रोल से चलने वाली मोटरसाइकिल या स्कूटर की जगह ई-बाइक काफी किफायती साबित होती है.

ई-स्कूटर और ई-बाइक में से किसे चुनें?
अब बात कि ई-बाइक और ई-स्कूटर में किसे खरीदा जाए. तो ये बात निश्चित तौर पर आपकी जरूरत पर निर्भर करती है. ई-स्कूटर आपको ज्यादा दूर तक जाने की सहूलियत देता है, लेकिन अभी भी देश में कुछ ही स्कूटर हैं जिनमें रिमूवेबल बैटरी मौजूद हैं, ऐसे में इन्हें चार्ज करना अभी एक समस्या है. वहीं इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए आपको रजिस्ट्रेशन कराना होता है. जबकि ई-बाइक के लिए नहीं. इतना ही नहीं ई-स्कूटर और ई-बाइक की कीमत में बहुत अंतर होता है, तो इनमें से किसी एक के चुनाव का निर्णय आपके बजट और जरूरत के मेल खाने पर निर्भर करता है.

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