ज़रा सोचिए. सुबह दफ्तर की जल्दी है. सामने की सड़क घूमकर जा रही है. तभी दिमाग में एक आइडिया आता है. “अरे यार, यहीं से उलटी साइड घुस जाते हैं, कौन देख रहा है.” ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा. चालान कटेगा, मोबाइल पर मैसेज आएगा और कहानी खत्म. दिल्ली-NCR सहित कई बड़े शहरों की सड़कों पर यह नजारा आम है. लेकिन अब कहानी में ट्विस्ट आ गया है. दिल्ली पुलिस ने पहली बार रांग साइड ड्राइविंग (Wrong Side Driving) को सिर्फ ट्रैफिक गलती नहीं, बल्कि अपराध मानकर FIR दर्ज कर दी है. यानी अब सड़क पर उलटी दिशा में गाड़ी घुमाई, तो मामला सीधा थाने और कोर्ट तक जा सकता है.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली कैंट थाना में 3 जनवरी को और कपासेड़ा थाना में सोमवार को गलत साइड ड्राइविंग के मामलों में FIR दर्ज हुई. दोनों ही मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 यानी लापरवाह ड्राइविंग और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए. खास बात यह रही कि इन FIR को दर्ज कराने वाले ट्रैफिक पुलिस के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर थे. ट्रैफिक पुलिस ने 112 नंबर पर कॉल कर स्थानीय थाने को सूचना दी और फिर शिकायत को FIR में बदला गया.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि, गलत साइड ड्राइविंग के मामले तेजी से बढ़े हैं. साल 2025 में ऐसे 3,05,843 मामले सामने आए. इनमें 1,78,448 चालान काटे गए और 1,27,395 मामलों में नोटिस भेजे गए. जबकि 2024 में यह आंकड़ा 2,49,210 पर ही था. पुलिस का मानना है कि सिर्फ चालान अब डर पैदा नहीं कर पा रहा है.
गलत दिशा में वाहन चलाना सिर्फ नियम तोड़ना नहीं है, यह सीधे जान से खेलने जैसा है. इससे ड्राइवर ही नहीं, सामने से आने वाला हर व्यक्ति खतरे में पड़ जाता है. पुलिस के मुताबिक सड़क हादसों की बड़ी वजह यही लापरवाही बन चुकी है. इसी को देखते हुए FIR दर्ज करने का विकल्प लंबे समय से विचार में था, ताकि डर भी बने और जिम्मेदारी भी.
अब तक गलत साइड ड्राइविंग पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगता था. लेकिन अगर FIR दर्ज होती है तो भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 281 के तहत 6 महीने तक की जेल, या 1,000 रुपये जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. इसके साथ ही वाहन भी जब्त किया जाएगा. यह अपराध जमानती है, लेकिन प्रक्रिया लंबी है. आरोपी को थाने और कोर्ट के चक्कर लगाने होंगे और गाड़ी छुड़ाने में भी वक्त लगेगा.
पुलिस ने साफ कहा है कि हर गलत साइड ड्राइविंग के मामले में FIR जरूरी नहीं है. लेकिन अगर सड़क पर ट्रैफिक ज़्यादा है, या पुलिस को लगे कि ड्राइवर की हरकत से किसी की जान खतरे में पड़ सकती है, तो FIR तय है. सिर्फ इस संभावना भर से ही लोग नियम मानने लगें, यही इस अभियान का मकसद है.