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Pending Toll Rule : टोल को लेकर सख्त सरकार! बकाया हुआ तो न मिलेगी NOC और न ही मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट

Toll dues pending: नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए सरकार ने टोल से जुड़े नियम और सख्त कर दिए हैं. अब टोल का बकाया होने पर वाहन से जुड़े कई कामों को करने ही अनुमति नहीं मिलेगी. बिना टोल टैक्स का भुगतान (Toll Payment) के वाहन मालिकों को एनओसी, फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी.

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नए नियम का मकसद टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत करना और टोल चोरी रोकना है. Photo: PTI
नए नियम का मकसद टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत करना और टोल चोरी रोकना है. Photo: PTI

New Toll Dues Rule: हाईवे पर गाड़ी चल रही है, टोल प्लाजा पर फास्टैग स्कैन हुआ, बीप की आवाज आई, बैरियर उठा और आप आगे बढ़ गए. आपको लगा कि, काम खत्म. लेकिन अब कहानी यहीं खत्म नहीं होगी. सरकार ने इस कहानी के एंड में एक जोरदार क्लाइमैक्स जोड़ दिया है. अगर टोल का पैसा सिस्टम में अटका, कट नहीं पाया या बकाया रह गया, तो उसका हिसाब आपकी गाड़ी के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगा. नतीजा ये कि अगली बार जब आप नॉन ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), फिटनेस या परमिट लेने जाएंगे, तो सिस्टम आपको रोक देगा. यानी हाईवे पर की गई एक अनदेखी अब सीधे आपके वाहन के कागजों पर भारी पड़ने वाली है.

दरअसल, देशभर के नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए सरकार ने टोल से जुड़े नियम और सख्त कर दिए हैं. अब अगर किसी वाहन पर टोल का बकाया है, तो उससे जुड़े कई अहम सरकारी काम रुक सकते हैं. मंगलवार को केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि बिना टोल टैक्स का भुगतान (Toll Payment) के वाहन मालिकों को एनओसी, फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी.

नए नियमों को मिली कानूनी मंजूरी

सरकार ने यह बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (सेकंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के तहत किए हैं, जो पुराने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में संशोधन करते हैं. इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत करना, टोल चोरी रोकना और भविष्य में बिना बैरियर वाले टोल सिस्टम को लागू करना है.

संशोधित नियमों में पहली बार “अनपेड यूजर फीस” की एक औपचारिक परिभाषा भी दी गई है. इसका मतलब है कि अगर किसी वाहन की आवाजाही इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम में दर्ज हो जाती है, लेकिन नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 के तहत तय टोल राशि जमा नहीं होती, तो वह बकाया टोल माना जाएगा.

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इन कामों पर सीधा असर

नए नियमों के मुताबिक, जब तक वाहन का सारा बकाया टोल क्लियर नहीं होगा, तब तक न तो वाहन की ओनरशिप ट्रांसफर के लिए एनओसी मिलेगी और न ही एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन ले जाने की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, जिन वाहनों पर टोल बकाया है, उनके फिटनेस सर्टिफिकेट को भी रेनुअल नहीं किया जाएगा.

कमर्शियल वाहनों के लिए सख्ती और बढ़ी

कमर्शियल वाहनों के मामले में नियम और कड़े कर दिए गए हैं. अगर कोई वाहन मालिक नेशनल परमिट के लिए आवेदन करता है, तो उसे पहले ही इस बात की तस्दीक करना जरूरी होगा कि उसके वाहन पर कोई भी टोल बकाया न हो. बकाया रहने की स्थिति में परमिट जारी नहीं किया जाएगा.

फॉर्म 28 में हुआ बदलाव

इन नियमों को लागू करने के लिए सरकार ने फॉर्म 28 में भी बदलाव किया है. अब वाहन मालिकों को यह घोषणा करनी होगी कि उनके वाहन पर कोई अनपेड टोल नहीं है. साथ ही, जरूरी जानकारी भी देनी होगी. सरकार ने फॉर्म 28 के कुछ हिस्सों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी करने की सुविधा भी दी है, ताकि प्रक्रिया और आसान हो सके.

फॉर्म 28 एक अहम दस्तावेज है, जिसका इस्तेमाल राज्य या जिले के बीच वाहन ट्रांसफर के लिए किया जाता है. यह फॉर्म इस बात की पुष्टी करता है कि वाहन पर कोई बकाया या कानूनी अड़चन नहीं है. सरकार का कहना है कि ये बदलाव भविष्य में मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी (MLFF) टोल सिस्टम लागू करने में भी मदद करेंगे.

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बैरियर-लेस टोलिंग की प्लानिंग

MLFF सिस्टम के जरिए बिना टोल प्लाजा पर रुके टोल वसूली की जाएगी. इससे जाम कम होगा, सफर तेज होगा और टेक्नोलॉजी के जरिए नियमों का पालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा. सरकार का मानना है कि नए नियम हाईवे पर यात्रा को ज्यादा आसान और ट्रांसपैरेंज बनाएंगे. इसलिए यदि आपके वाहन पर भी किसी तरह का टोल बकाया हो तत्काल इसकी जांच कर लें.

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