इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय ज्यादातर लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ मुखर हो रहे हैं. जहां इलेक्ट्रिक वाहनों को एक किफायती संसाधन के तौर पर देखा जाता है वहीं इसकी चार्जिंग से आपकी जेब कटने वाली है. जहां एक तरफ इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए जहां केंद्र सरकार सब्सिडी और छूट ऑफर कर रही है, वहीं कर्नाटक अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAR) ने फैसला सुनाया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी चार्ज करने के लिए पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर 18% गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लागू होगा.
यह मामला अथॉरिटी के सामने तब आया जब चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी नाम की एक बिजली वितरण कंपनी ने इलेक्ट्रिक दो और चार पहिया वाहनों के लिए कई सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की मांग की. कंपनी के लिए मुख्य मुद्दा यह पहचानना था कि क्या ऊर्जा शुल्क (Energy Charges) को वस्तुओं की आपूर्ति या सेवाओं की आपूर्ति के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए. यदि इसे माल की आपूर्ति माना जाता है, तो कंपनी जीएसटी छूट का दावा कर सकती है, क्योंकि बिजली, जिसे माल के रूप में वर्गीकृत किया गया है, अधिनियम के तहत छूट प्राप्त है. इसलिए, अथॉरिटी को यह तय करना था कि, ईवी चार्जिंग को बिजली की आपूर्ति के रूप में माना जाना चाहिए या नहीं.
अथॉरिटी ने दिया यह तर्क:
इस मामले में अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ने फैसला सुनाया है कि, इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी के भीतर इलेक्ट्रिक एनर्जी को कैमिकल एनर्जी में परिवर्तित किया जाता है. इसमें कहा गया है कि ईवी बैटरियों की चार्जिंग के दौरान उपयोग की जाने वाली बिजली उपभोग की जाती है, क्योंकि बिजली का उपयोग चार्जिंग स्टेशन के मालिक के परिसर में किया जा रहा है. इसको इस तरह समझाया गया है कि, जब कोई कार मालिक किसी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर अपने वाहन को चार्ज करता है, तो दरअसल वो ईवी चार्जिंग स्टेशन की सुविधाओं और सेवाओं का उपयोग कर रहा होता है. ऐसे में वो जीएसटी के लिए उत्तरदायी होगा.
कैसे बनेगा इनवॉइस:
वहीं चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी का कहना है कि, वह इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग शुल्क वसूलने के लिए इनवॉइस जारी करेगी. इसके दो कंपोनेंट शामिल किए जाएंगे. पहला ये कि, उपभोग की गई इलेक्ट्रिकसिटी यूनिट के लिए ऊर्जा शुल्क (Energy Fee) और दूसरा चार्जिंग स्टेशन द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए सेवा शुल्क (Service Charge) शामिल होगा. अथॉरिटी का कहना है कि, दोनों कंपोनेंट्स को सेवाओं की आपूर्ति के रूप में माना जाएगा और उन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा, साथ ही कंपनी को आईटीसी (ITC) भी मिलेगी.
बता दें कि, फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर चार्ज करने के लिए 18% जीएसटी का नियम कर्नाटक में लागू किया गया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि, कर्नाटक के ही तर्ज पर अन्य राज्यों में भी इसे लागू किया जाता है या नहीं. यदि ऐसा होता है, तो यह निश्चित रूप से भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों के लिच चिंता का विषय बनेगा.