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Aviation Fuel: आसमान में ‘ग्रीन रेवोल्यूशन’! एविएशन फ्यूल ATF में एथेनॉल ब्लेंडिंग की मंजूरी

Aviation Fuel Blending: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए अब इसमें सिंथेटिक फ्यूल मिलाने की अनुमति दे दी है. इसका मतलब यह है कि अब ट्रेडिशनल फ्यूल के साथ ऐसे नए तरह के फ्यूल की ब्लेंडिंग की जा सकेगी.

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ATF में सिंथेटिक ब्लेंडिंग की मंजूरी दे दी है. Photo: Freepik
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ATF में सिंथेटिक ब्लेंडिंग की मंजूरी दे दी है. Photo: Freepik

Aviation Fuel Synthetic Blending: हवाई यात्रा को सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर बनाने की दिशा में सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. अब विमान में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के नियमों में बदलाव किया गया है. इस बदलाव का सीधा असर आने वाले समय में हवाई सफर, एयरलाइंस के खर्च और पर्यावरण तीनों पर देखने को मिल सकता है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ATF से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए अब इसमें सिंथेटिक फ्यूल मिलाने की अनुमति दे दी है. इसका मतलब यह है कि अब ट्रेडिशनल फ्यूल के साथ इसमें भी एथेनॉल (Ethanol) की ब्लेंडिंग की जा सकेगी, जो ज्यादा साफ और टिकाऊ माने जाते हैं. इस कदम को एविएशन सेक्टर में बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है. इससे भविष्य में प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है.

सरकार ने 17 अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन में ATF के नियमों में बदलाव का निर्देश दिया है. अब एविएशन टरबाइन फ्यूल में सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन के साथ बने फ्यूल ब्लेंड को भी शामिल किया गया है. यह बदलाव इंडियन स्टैंडर्ड IS 1571 और IS 17081 के अनुसार किया गया है. आसान भाषा में समझें तो अब ATF सिर्फ ट्रेडिशनल फ्यूल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मॉडर्न ब्लेंडेड फ्यूल को भी इसमें इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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तुरंत प्रभाव से लागू हुए नियम

यह मॉडिफिकेशन आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत किया गया है और इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है. यानी अब एयरलाइंस और फ्यूल कंपनियां नए नियमों के अनुसार काम कर सकती हैं. माना जा रहा है कि इससे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.

इस संशोधन के साथ सरकार ने पहले के नियमों में मौजूद कुछ पुराने और रेफरेंसेज को हटा दिया है. इसके अलावा जांच और जब्ती से जुड़े नियमों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अनुसार अपडेट किया गया है. इससे नियमों को ज्यादा क्लीयर और मॉडर्न बनाने की कोशिश की गई है, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी उलझन न हो.

VAT घटाने पर मंथन, सस्ते होंगे टिकट

एक तरफ जहां फ्यूल के नियमों में बदलाव किया गया है, वहीं दूसरी तरफ इसकी बढ़ती कीमतों को लेकर भी सरकार चिंतित है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय अलग-अलग राज्यों के साथ ATF पर लगने वाले VAT को कम करने को लेकर बातचीत कर रहा है. इसमें दिल्ली, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य शामिल हैं. अगर VAT कम होता है, तो इससे एयरलाइंस को राहत मिल सकती है और यात्रियों के लिए टिकट सस्ते हो सकते हैं.

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हाल के समय में पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है. इसका सीधा असर एविएशन फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमत 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से ऊपर पहुंच गई है. वहीं घरेलू बाजार में भी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इससे एयरलाइंस की लागत में तेजी से इजाफा हुआ है.

रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 30 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा अकेले ATF का होता है. यानी फ्यूल पर एयरलाइन कंपनियां मोटी रकम खर्च करती हैं. ऐसे में फ्यूल महंगा होने का मतलब है कि एयरलाइंस के लिए खर्च संभालना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि एयरलाइंस अक्सर टिकट की कीमतें बढ़ाने को मजबूर होती हैं.

स्थिति को देखते हुए सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू एयरलाइंस के लिए फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी को धीरे-धीरे लागू करें. इसका मकसद यह है कि एयरलाइंस पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े और वे अपनी सेवाएं बिना किसी बड़ी परेशानी के जारी रख सकें.

आगे क्या हो सकता है असर

कुल मिलाकर, ATF के नियमों में किया गया यह बदलाव लंबे समय में एविएशन सेक्टर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे क्लीन फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, एयरलाइंस को नए विकल्प मिलेंगे, टिकटों के सस्ते होने की संभावना है और पर्यावरण पर पड़ने वाला असर भी कम किया जा सकेगा. हालांकि, फिलहाल फ्यूल की ऊंची कीमतें एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिस पर सरकार और राज्य मिलकर समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

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