'कुछ सीक्रेट...', भारत आए रूसी विदेश मंत्री ने तेल की खरीद को लेकर क्या कहा?

ब्रिक्स समिट के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत को रूसी कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ी है और यह कोई छिपी हुई बात नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, भले ही पश्चिमी देश इस पर सवाल उठाते रहे हों.

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सर्गेई लावरोव BRICS मीटिंग के लिए भारत आए थे. (Photo: Reuters) सर्गेई लावरोव BRICS मीटिंग के लिए भारत आए थे. (Photo: Reuters)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST

ब्रिक्स समिट के लिए भारत आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत और रूस के बीच बढ़ते तेल व्यापार को लेकर बड़ा बयान दिया. लावरोव ने साफ कहा कि भारत को रूस से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ी है और इसमें "कुछ भी सीक्रेट नहीं" है. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह सार्वजनिक आंकड़े हैं और रूस खुद इन्हें जारी करता रहा है.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में लावरोव ने कहा, "यह कोई गुप्त डेटा या आंकड़े नहीं हैं. हमने खुद इन्हें प्रकाशित किया है और भारत को तेल सप्लाई बढ़ी है." उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिमी देश लगातार भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर दबाव बनाते रहे हैं.

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हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल महीने में भारत के रूसी तेल आयात में कुछ गिरावट दर्ज की गई. फिनलैंड के थिंक-टैंक CREA यानी सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने अप्रैल में रूस से लगभग 4.5 अरब यूरो का तेल खरीदा, जो मार्च के मुकाबले करीब 15 फीसदी कम था. मार्च में यह आंकड़ा 5.3 अरब यूरो के आसपास था.

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इसके बावजूद रूस अब भी भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल सप्लायर्स में बना हुआ है. माना जा रहा है कि आयात में यह गिरावट अस्थायी है और इसके पीछे रिफाइनरी मेंटेनेंस और ऑपरेशनल बदलाव जैसे कारण हैं.

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भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और सस्ते ईंधन की जरूरतों पर आधारित है. भारत ने कई बार साफ किया है कि वह अपने नागरिकों और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखकर तेल खरीदता है. रूस से मिलने वाला डिस्काउंटेड ऑयल भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है.

यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद रूस ने एशियाई देशों, खासकर भारत और चीन, की तरफ अपना ऊर्जा व्यापार बढ़ा दिया. इसी वजह से वैश्विक तेल व्यापार का संतुलन भी तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है. लावरोव के बयान को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मॉस्को आने वाले समय में भी भारत के साथ अपनी ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत रखना चाहता है.

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