पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी जनआंदोलन को कुचलने के लिए इस्लामाबाद लगातार अमानवीय रास्ता अपना रहा है. इसी बीच वहां के संगठन जम्मू-कश्मीर जॉइट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के मुख्य सदस्य सरदार अमन खान ने विडियो संदेश जारी कर आज होने वाले विरोध प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा लोगों से शामिल होने की अपील की है. साथ ही उन्होंने भारत के नागरिकों, खास कर श्रीनगर के लोगों से विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने की अपील की है.
वीडियो में सरदार अमन खान कहते हैं, 'इस संदेश के जरिए मैं कश्मीर घाटी के लोगों खासकर श्रीनगर के लोगों से बात कर रहा हूं. हम राजौरी, जम्मू, लद्दाख, करगिल, गिलगित-बाल्टिस्तान और पूरे राज्य के लोगों से बात कर रहे हैं. जैसा कि आप सभी जानते हैं, कश्मीर (PoJK) को इस तरह के दबाव और दमन का सामना करते हुए लगभग एक महीना हो गया है. अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने पर यहां के लोगों के साथ जो ज़ुल्म, अन्याय, नरसंहार और सैन्य आक्रामकता हुई है, वह चरम पर पहुंच गई है.
'सांस लेने पर भी लगा रहे पहरा'
उन्होंने कहा कि इस बेहद मुश्किल दौर में हमारे खाने-पीने की चीजों की सप्लाई और दवाइयों के रास्ते बंद कर दिए गए हैं. यहां के शासक और सुरक्षा बल हमारे सांस लेने तक पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि यहां के लोग सांस क्यों ले रहे हैं. मुश्किल के इस वक्त में, हम सभी लोगों से, सीमा पार के लोगों से और खासकर श्रीनगर, पुंछ, मेंढर, राजौरी, जम्मू, घाटी, लद्दाख और करगिल के लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो हमने 5 जुलाई को विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है और हमें आप सभी के समर्थन की जरूरत है. आपको जरूर आगे आना चाहिए, हमारे अधिकारों के लिए बोलना चाहिए और इस ज़ुल्म और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए.'
'विपक्ष के नेताओं की एंट्री पर लगाई रोक'
इससे पहले 30 जून को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी अधिकारियों की उस दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी, जिसके तहत विपक्षी नेताओं के एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल को जबरन PoK में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. कमेटी ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक असहमति को कुचलने का एक और बड़ा सरकारी सबूत बताया था. JAAC ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने न केवल राजनीतिक आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में खाद्य सामग्री की आपूर्ति को पूरी तरह बाधित कर आम जनता तक पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे सरकार का असली चेहरा सबके सामने आ गया है.
UN ऑफिस से बाहर प्रदर्शन
PoK में बढ़ते इस मानवीय संकट और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ 2 जुलाई को नेशनल एंटी-टेररिज्म फ्रंट इंडिया ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के कार्यालय के बाहर एक उग्र प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र में हो रही हत्याओं और व्यवस्थागत मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए तत्काल वैश्विक हस्तक्षेप की मांग की. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी आगामी क्षेत्रीय चुनावों से पहले पाकिस्तान की दमनकारी रणनीतियों की कड़ी निंदा की है. एमनेस्टी ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए हिंसक हथियारों का इस्तेमाल करने और जेएएसी को एक 'प्रतिबंधित संगठन' के रूप में अवैध रूप से नामित कर मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है.
'600 से ज्यादा कार्यकर्ता गिरफ्तार'
उधर, PoK के प्रसिद्ध कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने भी क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने पाकिस्तान पर क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि खाने-पीने की चीजों को पूरी तरह रोक दिया गया है.
मिर्जा के मुताबिक, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद से हालात हर घंटे बदतर होते जा रहे हैं और अब तक 600 से ज्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं और समिति के कर्मचारियों को जेल में डाला जा चुका है.
अमजद अयूब मिर्जा ने बताया कि 5 जुलाई को, जिसे आमतौर पर पाकिस्तान द्वारा 'कश्मीर एकजुटता दिवस' के रूप में मनाया जाता था, अब उसे पूरी तरह से पाकिस्तान के ही काले कारनामों के खिलाफ विरोध दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इसके समर्थन में न केवल पीओजेके, बल्कि लंदन में भी हजारों लोग इकट्ठा होकर पाकिस्तानी सेना की क्रूरता के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तानी सेना विरोध प्रदर्शनों की निगरानी के लिए ड्रोनों का इस्तेमाल कर रही है, जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने आगामी 27 जुलाई को होने वाले स्थानीय क्षेत्रीय चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान किया है.
दरअसल, इस पूरे भारी विवाद की जड़ पीओके की विधायी विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें हैं. स्थानीय नागरिक समूहों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन सीटों का दुरुपयोग करके यहां के चुनावों को प्रभावित करता है और अपनी कठपुतली सरकारें स्थापित करता है. इसी राजनीतिक दखलंदाजी के खिलाफ स्थानीय अवाम ने जेएएसी के बैनर तले बड़ा आंदोलन छेड़ रखा है, जिसे दबाने के लिए पाकिस्तानी बल नागरिकों पर लगातार जुल्म कर रहे हैं और इंटरनेट को बंद कर दिया है.
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